मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश के कई राज्यों में चर्चा तेज है। इस बीच, चुनाव आयोग के अंदर इस प्रक्रिया को लेकर मतभेद होने की खबर सामने आई। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर असहमति थी। यह भी कहा गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने लगातार कई बैठकों में प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। हालांकि, अब भारत निर्वाचन आयोग ने इन खबरों को खारिज कर दिया है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आयोग में किसी तरह का मतभेद नहीं है।
आयोग के सूत्रों ने बुधवार को कहा कि SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी से सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।
ECI सूत्रों के मुताबिक, हालांकि किसी भी मुद्दे पर चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन SIR सहित भारत निर्वाचन आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और इनमें दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की सहमति रही है।
मीडिया रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में SIR के अलावा फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, मतदाता संबंधी फैसलों के खिलाफ अपील और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों ने कुछ मामलों में सवाल उठाया कि फैसले और आदेश उनकी जानकारी के बिना कैसे जारी किए गए। इन आपत्तियों की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश को भी दी गई थी।
विपक्ष ने उठाए सवाल, CEC को हटाने की मांग
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग को अपनी मर्जी से चला रहे हैं। पार्टी ने कहा कि शिकायतों से साफ है कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में सिर्फ ज्ञानेश कुमार की ही चलती है। कांग्रेस ने कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया और 'वोट चोरी' व चुनाव आयोग में राजनीतिक दखलंदाजी के अपने पुराने आरोपों को दोहराया।
समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस रिपोर्ट को बेहद गंभीर बताया और आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त अपने सही कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा, "इसका सीधा मतलब है कि सभी चुनाव आयुक्त अपने सही कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। अगर किसी स्वतंत्र संस्था के सदस्यों को सही काम करने की आजादी नहीं है या उनकी बात नहीं सुनी जाती है, तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। सत्ता में बैठे लोगों की कठपुतली बनकर लोकतंत्र के साथ धोखा करना एक गंभीर संवैधानिक अपराध है। यह लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश से कम नहीं है।" यादव ने सुप्रीम कोर्ट से भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की।
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने CEC को तुरंत हटाने और कोर्ट की निगरानी में जांच के आदेश देने की मांग की। उन्होंने कहा, "कथित तौर पर किसी एक राजनीतिक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए लाखों वोटरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना हमारे लोकतंत्र की नींव पर हमला है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद, INDIA गठबंधन की सभी विपक्षी पार्टियों ने CJI और SC जजों को पत्र लिखकर गंभीर चिंताएं जताई थीं। हालांकि, उन आरोपों की न तो जांच की गई और न ही उन पर उचित गौर किया गया। जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले गंभीर सवाल बार-बार उठाए जाते हैं और उन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता, तो इससे संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है। सुप्रीम कोर्ट इससे मुंह नहीं मोड़ सकता। अंतिम जिम्मेदारी उसी की है। क्या CJI की अध्यक्षता वाली बेंच इस पर कोई कदम उठाएगी?"
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता की बात करते हुए इस बहस में अपनी राय रखी। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट होकर सबसे पहले इस CEC का मामला सुलझाना चाहिए। बाकी सब बातें बाद में आती हैं।
UBT सेना के सांसद संजय राउत ने CEC की और भी कड़े शब्दों में आलोचना की और दावा किया कि CEC को जल्द ही जेल जाना पड़ सकता है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' के एक लेख का हवाला देते हुए उन्होंने X पर पोस्ट किया, "ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे! उन्हें जाना ही होगा! उनके आका देश छोड़कर भाग जाएंगे।"
CPI-M के सांसद जॉन ब्रिटास ने मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग को 'एक व्यक्ति की तानाशाही' करार दिया। ब्रिटास ने X पर लिखा, "यह अब चुनाव आयोग नहीं रहा। CEC ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में यह एक व्यक्ति की तानाशाही बन गया है! दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है। उन्होंने नए वोटरों को जोड़ने और बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया को अनधिकृत और गैर-कानूनी बताया है। उन्होंने चुपके से नाम हटाने, उन्हें बहाल करने और 'फॉर्म 6' में बदलाव करने पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जिनसे पहली बार वोट देने वाले युवा परेशान होते हैं और ये सब उन्हें अंधेरे में रखकर किया गया।"
DMK के प्रवक्ता TKS इलांगोवन ने बुधवार को BJP पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी SIR प्रक्रिया के साथ खेल कर रही है। उन्होंने कहा, "BJP सरकार इस SIR के साथ खेल कर रही है। वे मुसलमानों को इस देश से हटाना चाहते हैं। यही उनका मकसद है। वे इसे हिंदू देश बनाना चाहते हैं, जो नामुमकिन है, क्योंकि कानून के मुताबिक लोगों ने वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया है और वे काफी समय से यहां रह रहे हैं, और उन्हें यहां रहने की इजाजत मिलनी चाहिए।"
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