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वायुसेना के IL-76MD विमान ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 13,629 फीट की ऊंचाई पर लैंडिंग, चीन सीमा के पास बड़ी कामयाबी

 Reported By: Manish Prasad,  Written By: Niraj Kumar
 Published : Nov 07, 2026 01:49 pm IST,  Updated : Nov 07, 2026 02:54 pm IST

भारतीय वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए इतिहास रच दिया है। वायुसेना के भारी सैन्य परिवहन विमान IL-76MD ने 13,629 फीट की ऊंचाई पर स्थित न्योमा एयरफील्ड पर सफल लैंडिंग की है।

वायुसेना का IL-76MD विमान - India TV Hindi
वायुसेना का IL-76MD विमान Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना ने कामयाबी की एक नई इबारत लिख दी है। पहली बार वायुसेना के भारी सैन्य परिवहन विमान IL-76MD ने 13,629 फीट की ऊंचाई पर लैंडिंग कर वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है। यह लैडिंग लद्दाख के न्योमा एयरफील्ड पर हुई। इसके साथ ही इस विमान ने दुनिया में अब तक की सबसे अधिक ऊंचाई पर लैंडिंग करने का रिकॉर्ड बनाया है। यह उपलब्धि भारत की सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

चीन सीमा के करीब है न्योमा एयरफील्ड

बता दें कि न्योमा एयरफील्ड पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण एयरफील्ड है। इसके विकसित होने से भारतीय सेना को सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों, सैन्य उपकरणों और जरूरी रसद की तेजी से आवाजाही में मदद मिलेगी। दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शामिल इस इलाके में सैन्य अभियानों को बनाए रखने के लिहाज से न्योमा की अहमियत काफी अधिक है।

IL-76MD की सफल लैंडिंग वायुसेना के विमान की क्षमता के साथ-साथ उसके चालक दल के कौशल, सटीकता और पेशेवर दक्षता को भी दर्शाती है। इससे पूर्व भी भारतीय वायुसेना ने न्योमा में अलग-अलग विमानों और हेलीकॉप्टरों का संचालन कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

AN-32 से IL76MD तक का सफर

न्योमा एयरफील्ड पर विमान संचालन का इतिहास सितंबर 2009 में शुरू हुआ था। उस समय भारतीय वायुसेना का AN-32 यहां उतरने वाला पहला फिक्स्ड विंग विमान बना था। इसके बाद 12 नवंबर 2025 को वायुसेना प्रमुख ने C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से यहां लैंडिंग की थी। इसे एयरफील्ड के उन्नयन और परिचालन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना गया था।

इसके अलावा एमआई-17  हेलीकॉप्टर ऊंचाई वाले इस इलाके में सैनिकों की आवाजाही और रसद पहुंचाने में मदद करते हैं। सीएच-47 चिनूक हेलीकॉप्टर भारी उपकरणों और जरूरी सामान की ढुलाई की क्षमता प्रदान करता है। वहीं एएच-64 अपाचे भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमानन क्षमता का हिस्सा है। अब IL-76MD की 13,629 फीट की ऊंचाई पर सफल लैंडिंग ने वायुसेना के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह उपलब्धि पूर्वी लद्दाख में भारत की सैन्य लॉजिस्टिक्स और तेजी से सैनिकों की तैनाती करने की क्षमता को और मजबूती देने वाली है। 

बता दें कि वायुसेना ने पिछले 25 अक्तूबर को 94 वां स्थापना दिवस मनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ‘विंग्स ओवर गंगा’ के जरिए भारतीय वायु सेना ने यह प्रदर्शित किया कि वह पारंपरिक हवाई शक्ति के साथ-साथ आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों के लिए भी अपनी क्षमताओं को लगातार विकसित कर रही है।

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