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सरकार ने पिछले 10 सालों में नक्सलवाद पर कैसे लगाई नकेल? 10 हजार माओवादियों ने डाले हथियार; जानें क्या-क्या रहे अहम फैक्टर

 Edited By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Mar 29, 2026 01:36 pm IST,  Updated : Mar 29, 2026 01:36 pm IST

केंद्र सरकार के कई अहम प्रयासों की वजह से नक्सलवाद पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकी है। गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने की बात भी कही है। ऐसे में आइये जानते हैं कि वह कौन-कौन से फैक्टर हैं, जिनकी वजह से नक्सलवाद पर लगाम लगाई जा सकी है।

नक्सलवाद पर नकेल।- India TV Hindi
नक्सलवाद पर नकेल। Image Source : INDIA TV

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने की बात कही है। इस बीच अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा दबाव और पुनर्वास प्रयासों के मिले-जुले प्रयासों की वजह से नक्सलवाद को करारा झटका लगा है। नक्सलवाद देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले विद्रोहों में से एक था। अधिकारियों के मुताबिक पिछले एक दशक में 10,000 से अधिक माओवादियों ने हथियार डाल दिए हैं और शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक 2025 में 2,300 माओवादियों ने हथियार डाले, जबकि 2026 के पहले तीन महीनों में 630 से अधिक कैडरों ने सशस्त्र विद्रोह के बजाय मुख्यधारा के जीवन को चुना। ये आंकड़े 2014 से 2026 की शुरुआत तक के वामपंथी उग्रवादियों के आत्मसमर्पण से संबंधित हैं।

 "रेड कॉरिडोर" में सड़क निर्माण

एक अधिकारी के अनुसार, सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ एक एकीकृत, बहुआयामी और निर्णायक रणनीति अपनाई है, जो पिछली सरकारों के बिखरे हुए दृष्टिकोण की जगह ले रही है। इसका एक उदाहरण "रेड कॉरिडोर" में सड़क निर्माण का है, जो कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों से होते हुए "पशुपति से तिरुपति" तक फैला हुआ था, जहां ठेकेदारों ने काम करने से इनकार कर दिया था। केंद्र सरकार ने सीमा सड़क संगठन को पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के प्रमुख क्षेत्रों में सड़कें बनाने का काम सौंपा, जिसमें विद्रोह के इन गढ़ों में पांच प्रमुख सड़कों और छह महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण शामिल है।

6 सालों में बनाए 361 सुरक्षा शिविर

अधिकारियों ने बताया कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) प्रभावित क्षेत्रों में 15,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया है, जिनमें से 12,250 किलोमीटर सड़कें अकेले पिछले 10 वर्षों में पूरी हुई हैं। उन क्षेत्रों में जहां उग्रवादियों का दबदबा था, जिन्हें "सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती" कहा जाता था, वहां किलेबंद पुलिस स्टेशनों की संख्या 2014 में 66 से बढ़कर पिछले 10 वर्षों में 586 हो गई है। इसके अतिरिक्त, पिछले 6 वर्षों में 361 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं और परिचालन पहुंच को मजबूत करने के लिए 68 रात्रिकालीन हेलीपैड बनाए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप नक्सली घटनाओं को दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशनों की संख्या 2013 में 76 जिलों में 330 से घटकर जून 2025 तक केवल 22 जिलों में 52 रह गई है।

सरकारी योजनाओं का आम लोगों को लाभ

उन्होंने कहा कि सुरक्षा दबाव और पुनर्वास प्रयासों के संयोजन पर केंद्रित सरकार की रणनीति ने आंदोलन की जड़ को कमजोर कर दिया है, जिससे छत्तीसगढ़ में यह आंदोलन नेतृत्वहीन हो गया है, जो इसकी शुरुआत के बाद से पहली बार हुआ है। जिन क्षेत्रों में शासन व्यवस्था कमजोर थी और माओवादियों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच दबाव और सहमति दोनों का माहौल बनाया था, वहां सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचने लगा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत घरों की संख्या मार्च 2024 में 92,847 से बढ़कर अक्टूबर 2025 में 2,54,045 हो गई। इसी अवधि में आधार पंजीकरण भी 23.50 लाख से बढ़कर 24.85 लाख हो गया और 19.77 लाख की तुलना में 21.44 लाख आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। 

10 वर्षों में 250 से अधिक एकलव्य विद्यालयों को मंजूरी

सरकार ने उग्रवाद की सामाजिक-आर्थिक जड़ों को कमजोर करने के उद्देश्य से शिक्षा और अवसंरचना में भारी निवेश किया है। पिछले 10 वर्षों में 250 से अधिक एकलव्य विद्यालयों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 179 कार्यरत हैं। इनके अलावा 11 केंद्रीय विद्यालय और 6 नवोदय विद्यालय भी संचालित हैं। केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित 48 जिलों में कौशल विकास पहल भी शुरू की है, जिसके तहत 495 करोड़ रुपये की लागत से इतने ही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को मंजूरी दी गई है और 61 कौशल विकास केंद्रों (एसडीसी) को स्वीकृति दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 46 आईटीआई और 49 एसडीसी पहले से ही कार्यरत हैं, जो स्थानीय युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं, साथ ही नक्सली भर्ती को कम कर रहे हैं और दूरस्थ समुदायों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में एकीकृत कर रहे हैं।

रेलवे लाइन बनाने पर किया काम

सरकार द्वारा जारी एलडब्ल्यूई आंकड़ों के अनुसार, लगभग 9,000 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 2,343 को 4जी में अपग्रेड किया जा रहा है। दक्षिण बस्तर से छत्तीसगढ़ के मध्य भाग तक रेल संपर्क स्थापित करने के लिए, दल्लीराजहारा और रावघाट के बीच 95 किलोमीटर लंबी रेल लाइन विकसित की गई है। उन्होंने बताया कि रावघाट और जगदलपुर के बीच 140 किलोमीटर लंबी रेल लाइन विकसित की जाएगी, और रेल मंत्रालय द्वारा दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) से मुनुगुरु (तेलंगाना) तक 180 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का सर्वेक्षण पहले ही पूरा कर लिया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के आंतरिक क्षेत्र प्रमुख भारतीय बाजारों से जुड़ जाएंगे। 

जांच एजेंसियों ने भी दिया झटका

अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक दशक में गुरिल्ला आंदोलन की गिरती स्थिति निरंतर राजनीतिक संकल्प, समन्वित सुरक्षा अभियानों, विकासात्मक गतिविधियों और प्रभावी पुनर्वास नीतियों की कहानी बयां करती है, जिसके परिणामस्वरूप सरेंडर करने वाले और लोकतांत्रिक मुख्यधारा में लौटने वाले माओवादी कैडरों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। नक्सलियों के वित्तपोषण पर की गई कार्रवाई ने आंदोलन को करारा झटका दिया, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 40 करोड़ रुपये, राज्य अधिकारियों ने अतिरिक्त 40 करोड़ रुपये जब्त किए और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 12 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की।

आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास योजना ने दिया भरोसा

सरकार के एक बयान में कहा गया था, "एक साथ की गई कार्रवाई ने शहरी नक्सलियों को गंभीर नैतिक और मनोवैज्ञानिक क्षति पहुंचाई है और उनके सूचना युद्ध नेटवर्क पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है।" बयान में कहा गया कि केंद्र से प्राप्त वित्तीय और रसद संबंधी सहायता ने सुरक्षा संबंधी व्यय योजना जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य की क्षमताओं को मजबूत किया है, जो राज्यों को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में परिचालन लागत को कवर करने में सहायता करती है। हिंसक आंदोलन को नियंत्रित करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक पुनर्वास नीति का पुनर्गठन रहा है। संशोधित आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास योजना पूर्व कार्यकर्ताओं के लिए वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और आवास सहायता प्रदान करती है।

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