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जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लाया जाएगा महाभियोग प्रस्ताव, जानें क्या बोले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

 Edited By: Avinash Rai @RaisahabUp61
 Published : Jun 04, 2025 04:36 pm IST,  Updated : Jun 04, 2025 06:54 pm IST

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। इसे लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता है।

Impeachment motion will be brought against Justice Yashwant Verma know what Law Minister Kiren Rijij- India TV Hindi
यशवंत वर्मा के खिलाफ लाया जाएगा महाभियोग प्रस्ताव Image Source : PTI

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने में सभी राजनीतिक दलों को साथ लेने के सरकार के संकल्प को रेखांकित करते हुए कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को "राजनीतिक चश्मे" से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के उद्देश्य से की जा रही यह कवायद एक "सहयोगी प्रयास" हो, जो कथित भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हैं और जिन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने दोषी ठहराया है। रिजिजू ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में प्रस्ताव लाने के लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी दल न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के लिए "संयुक्त रूप से" प्रस्ताव लाएं।

किरेन रिजिजू ने कही ये बात

रिजिजू ने कहा कि वह छोटे दलों से संपर्क करेंगे, जबकि सभी प्रमुख दलों को न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "सरकार को लगता है कि भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला किसी एक राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है। भ्रष्टाचार के खतरे के खिलाफ लड़ना सभी दलों का रुख है, चाहे वह न्यायपालिका हो या कोई अन्य क्षेत्र।" मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को साथ लेना चाहेगी क्योंकि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को "राजनीतिक चश्मे" से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि अधिकांश दल आंतरिक रूप से इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद अपना रुख बदल देंगे। एक सवाल के जवाब में रिजिजू ने कहा कि प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाएगा या राज्यसभा में, यह निर्णय प्रत्येक सदन के कामकाज के आधार पर लिया जाएगा।

क्या कहता है न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968?

न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, जब किसी न्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव किसी भी सदन में स्वीकार कर लिया जाता है, तो स्पीकर या चेयरमैन, जैसा भी मामला हो, एक तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे, जो उन आधारों की जांच करेगी, जिनके आधार पर उसे हटाने (या, लोकप्रिय शब्द में, महाभियोग) की मांग की गई है। इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक "प्रतिष्ठित न्यायविद" शामिल होते हैं। रिजिजू ने कहा कि वर्तमान का मामला "थोड़ा अलग" है, क्योंकि तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना द्वारा गठित एक आंतरिक समिति पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है।

(इनपुट-पीटीआई)

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