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BSF में स्वदेशी श्वानों का जलवा, खासियतें जान आप भी कहेंगे- गजब, PM मोदी भी हैं मंत्रमुग्ध

 Reported By: Manish Prasad, Edited By: Amar Deep
 Published : Oct 31, 2025 02:15 pm IST,  Updated : Oct 31, 2025 04:34 pm IST

गुजरात के एकता नगर में आज एकता दिवस परेड का आयोजन किया गया। इस परेड में भारतीय नस्ल के श्वानों ने भी प्रस्तुतियां दीं। पीएम मोदी भी इस दौरान मौजूद रहे।

पीएम मोदी ने देखी श्वानों की प्रस्तुति।- India TV Hindi
पीएम मोदी ने देखी श्वानों की प्रस्तुति। Image Source : X/NARENDRAMODI

भारत के इतिहास, संस्कृति और पुराणों में श्वानों को सदैव एक विशिष्ट और सम्माननीय स्थान प्राप्त रहा है। भारतीय मूल की श्वान-नस्लें अपने अद्वितीय साहस, निष्ठा और कार्यकुशलता के लिए जानी जाती रही हैं। राजसी दरबारों से लेकर रणभूमि तक इनकी उपस्थिति, भारत की गौरवशाली सैन्य और सांस्कृतिक परंपरा में मानव एवं पशु के बीच अटूट संबंध का प्रतीक रही है।

पीएम मोदी ने की पहल

इस ऐतिहासिक परंपरा को एक नई दिशा तब प्राप्त हुई जब जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टेकनपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र (NTCD) का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय नस्लों के श्वानों को सुरक्षा बलों में प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका यह दूरदर्शी मार्गदर्शन, स्वदेशी नस्लों को पहचान दिलाने, उन्हें प्रशिक्षित करने तथा उन्हें परिचालन भूमिकाओं में सम्मिलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

मन की बात में किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने इस सोच को और बल प्रदान करते हुए 30 अगस्त 2020 को अपने ‘मन की बात’ में भारतीय नस्लों के श्वानों को अपनाने और प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। यह अपील ‘आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना से ओतप्रोत थी, जिसने संपूर्ण देश में स्वदेशी गर्व, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की एक सशक्त चेतना को जन्म दिया।

बीएसएफ में दो नस्लों को किया शामिल

प्रधानमंत्री की प्रेरणा से अनुप्राणित होकर, बीएसएफ ने दो प्रमुख भारतीय श्वान नस्लों- रामपुर हाउंड और मुधोल हाउंड को बल में सम्मिलित कर एक ऐतिहासिक पहल की। रामपुर हाउंड, उत्तर प्रदेश के रामपुर रियासत से संबंधित है, जिसे नवाबों द्वारा गीदड़ों व अन्य बड़े शिकार के लिए विकसित किया गया था। यह नस्ल अपनी गति, सहनशक्ति व निर्भीकता के लिए प्रसिद्ध है। मुधोल हाउंड, जो दक्कन के पठार का मूल निवासी है, पारंपरिक रूप से शिकार व सुरक्षा कार्यों में प्रयुक्त होता रहा है। इसे मराठा सेनाओं से भी जोड़ा जाता है। बाद में राजा मलोजीराव घोरपड़े द्वारा इसका संरक्षण एवं संवर्धन किया गया, और उन्होंने इसे ब्रिटिश अधिकारियों के समक्ष "Caravan हाउंड" के रूप में प्रस्तुत किया। इन भारतीय श्वान-नस्लों की प्रमुख विशेषताएं हैं- उच्च फुर्ती, सहनशक्ति, अनुकूलनशीलता, रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं न्यूनतम देखभाल की आवश्यकता। ये गुण इन्हें भारत के विविध भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावी बनाते हैं।

बीएसएफ दे रहा प्रशिक्षम

बीएसएफ, न केवल इन श्वानों को टेकनपुर स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षित कर रहा है, बल्कि इनके प्रजनन का कार्य भी सक्रिय रूप से कर रहा है। यह पहल अब सहायक K9 प्रशिक्षण केंद्रों और क्षेत्रीय इकाइयों तक विस्तारित हो चुकी है, जिससे भारतीय नस्लों के श्वानों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्तमान में, 150 से अधिक भारतीय नस्लों के श्वान देश के विभिन्न सामरिक एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जैसे कि पश्चिमी व पूर्वी सीमाएं, तथा नक्सल विरोधी अभियान में तैनात किए जा चुके हैं। इनकी प्रभावशाली कार्यक्षमता ने स्वदेशी नस्लों को सुरक्षा बलों की परिचालन संरचना में एक सुदृढ़ स्थान प्रदान किया है।

इस पहल की सफलता का प्रमाण वर्ष 2024 के अखिल भारतीय पुलिस ड्यूटी मीट (लखनऊ) में मिला, जहां बीएसएफ की "रिया", एक मुधोल हाउंड, ने सर्वश्रेष्ठ ट्रैकर ट्रेड श्वान एवं 'डॉग ऑफ द मीट' दोनों खिताब अर्जित किए। यह पहला अवसर था जब किसी भारतीय नस्ल के श्वान ने 116 विदेशी नस्लों को पराजित कर यह उपलब्धि प्राप्त की। यह भारतीय श्वानों की उत्कृष्टता, अनुशासन एवं क्षमताओं का जीवंत प्रमाण है।

एकता परेड में श्वानों ने दी प्रस्तुति

आज गुजरात के एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में स्वदेशी श्वानों की एक झलकी देखने को मिली। यहां केवल भारतीय नस्लों के श्वानों की एक मार्चिंग टुकड़ी का बीएसएफ ने प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर एक विशेष श्वान प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें सामरिक कुशलताओं और परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। यह आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भारत की K9 शक्ति का प्रतीक है।

भारतीय नस्लों के श्वानों का बीएसएफ में समावेश, प्रशिक्षण, प्रजनन एवं तैनाती, भारत की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी विरासत एवं राष्ट्रीय गौरव के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। यह पहल न केवल भारत की परंपरागत नस्लों को पुनर्जीवित करती है, अपितु यह भी प्रमाणित करती है कि भारत आत्मविश्वास, शक्ति और गरिमा के साथ अपने पथ पर अग्रसर है और इस मार्ग में भारतीय श्वान राष्ट्र सेवा में अग्रिम पंक्ति में हैं।

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