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डॉक्टर ने दी बांग्लादेशी घुसपैठियों की जानकारी, उसी पर हो गई FIR; हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jul 30, 2026 02:58 pm IST,  Updated : Jul 30, 2026 02:58 pm IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए डॉक्टर नागेंद्रप्पा टी. के खिलाफ दर्ज FIR की जांच पर रोक लगा दी। डॉक्टर ने कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की जानकारी पुलिस को दी थी। कोर्ट ने इसे जवाबी कार्रवाई बताते हुए पुलिस से मामले की रिपोर्ट मांगी है।

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई है। Image Source : PTI FILE

Highlights

  • अवैध प्रवासियों की पहचान कराने वाले डॉक्टर के खिलाफ जांच पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई।
  • कोर्ट बोला- अवैध प्रवासियों को संरक्षण देना देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा।
  • FIR दर्ज करने में पुलिस की जल्दबाजी पर सवाल, FRRO को भी बनाया पक्षकार।

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बेंगलुरु पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि अगर व्यवस्था इसी तरह अवैध प्रवासियों का संरक्षण करती रही तो यह देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। हाईकोर्ट ने डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता नागेंद्रप्पा टी. के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की आगे की जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि यह कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है।

'यह साफ तौर पर जवाबी कार्रवाई लगती है'

जस्टिस नागप्रसन्ना ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति पुलिस की मदद कर संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान करवा रहा था, उसी के खिलाफ इतनी जल्दी क्रिमिनल केस कैसे दर्ज कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने कोर्ट को बताया कि नागेंद्रप्पा एक डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने पुलिस की मदद करते हुए कुछ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कराई थी ताकि उन्हें देश से वापस भेजा जा सके। जांच अधिकारी ने सुबह 11:30 बजे FRRO को पत्र लिखकर कथित अवैध प्रवासी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन सिर्फ 15 मिनट बाद, सुबह 11:45 बजे, उसी कथित विदेशी नागरिक की शिकायत के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई। अदालत ने कहा कि यह साफ तौर पर 'जवाबी कार्रवाई' लगती है।

'इसीलिए अवैध प्रवासी यहां टिके रहते हैं'

कोर्ट ने पूछा कि आखिर इतनी जल्दी मारपीट का मामला कैसे दर्ज कर लिया गया। जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा, 'इसीलिए अवैध प्रवासी यहां टिके रहते हैं। अगर सरकार और व्यवस्था उन्हें इस तरह समर्थन देगी तो ऐसे मामले बढ़ेंगे। यह व्यवस्था के लिए खतरनाक है और राष्ट्र की सुरक्षा पर सीधा खतरा है।' कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब जांच अधिकारी खुद FRRO को लिखकर संबंधित व्यक्ति को अवैध प्रवासी बता रहा था, तो उसी व्यक्ति की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज करने की क्या जरूरत थी। कोर्ट ने कहा, 'जो नागरिक अवैध प्रवासी की जानकारी दे रहा है, उसी के खिलाफ केस दर्ज कर दिया गया। आखिर क्यों?'

पुलिस की कार्यशैली पर जताई नाराजगी

मारपीट के आरोपों पर भी हाईकोर्ट ने सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के शरीर पर कोई चोट नहीं थी, न ही किसी अस्पताल का रिकॉर्ड या मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई। इसके बावजूद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया। कोर्ट ने टिप्पणी की, 'न कोई घाव, न मेडिकल रिकॉर्ड, सिर्फ आरोप लगाया गया और FIR दर्ज कर दी गई।' सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई। जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि अगर पुलिस इस तरह अवैध प्रवासियों के पक्ष में कार्रवाई करेगी तो ऐसी व्यवस्था पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 'तुष्टीकरण बंद होना चाहिए। आखिर यह कब तक चलेगा?'

मकान मालिकों की भूमिका पर जताई चिंता

कोर्ट ने मकान मालिकों की भूमिका पर भी चिंता जताई। जज ने कहा कि कई जगह विदेशी नागरिक किराये पर रह रहे हैं और कुछ मकान मालिक थोड़े से अतिरिक्त किराये के लालच में बिना जांच-पड़ताल के कमरे दे देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लालच देश की सुरक्षा से बड़ा हो जाए तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। राज्य सरकार ने अदालत से कहा कि वह किसी का संरक्षण नहीं कर रही है और जांच से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने के लिए समय मांगा। सरकार ने यह भी बताया कि कथित अवैध प्रवासियों को FRRO के सामने पेश किया गया है और उन्हें अस्थायी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।

मामले की अगली सुनवाई अब 6 अगस्त को

अदालत ने कहा कि मानक प्रक्रिया (SOP) के अनुसार उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई होनी चाहिए थी, न कि शिकायत करने वाले नागरिक के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए था। अदालत ने FRRO को भी इस मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है और उसे अगली सुनवाई तक कथित अवैध प्रवासियों की स्थिति पर रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही डॉक्टर के खिलाफ दर्ज मामलों की आगे की जांच पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को तय की गई है। बता दें कि देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई होती रहती है। हाल ही में गुरुग्राम से 13 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया था। (PTI से इनपुट्स के साथ)

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