1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. सुप्रीम कोर्ट का आदेश, फिलहाल प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई ना की जाए

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, फिलहाल प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई ना की जाए

 Reported By: Atul Bhatia Written By: Kajal Kumari
 Published : Jul 28, 2026 04:57 pm IST,  Updated : Jul 28, 2026 05:21 pm IST

नीट पेपर लीक मामले में देश के कई हिस्सो में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें हिंसक वारदातें भी हुईं। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। जानिए कोर्ट ने और क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट पर आदेश- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट पर आदेश

Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
  • प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर ना करें सख्त कार्रवाई
  • नीट पेपर लीक मामला

NEET-UG 2026 पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और कई राज्यों से जवाब मांगा है। साथ ही कहा है कि फिलहाल प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न की जाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि याचिकाओं में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें पुलिस की ओर से जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने की बात कही गई है।

याचिका में लगाए गए आरोप, पुलिस ने रखा अपना पक्ष

याचिकाओं के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, पैलेट गन, रबर बुलेट, आंसू गैस और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया गया। यह भी कहा गया कि कुछ छात्रों को गंभीर चोटें आईं और एक छात्र की आंख की रोशनी जाने का भी दावा किया गया है। एक महिला समेत कई लोगों के घायल होने और एक पत्रकार के साथ मारपीट के आरोप भी लगाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान दूसरी ओर घायल पुलिसकर्मियों की तरफ से भी अपना पक्ष रखा गया। उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे 280 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इस संबंध में फोटो और वीडियो भी कोर्ट के सामने रखे गए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि सरकार निष्पक्ष जांच कराने पर कोई आपत्ति नहीं रखती, लेकिन पुलिस पर लगाए गए ज्यादा बल इस्तेमाल करने के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक और आपराधिक तत्व भी शामिल हो गए थे, जिन्होंने हिंसा की।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखाई देती है। हालांकि अंतिम फैसला लेने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और संबंधित राज्यों को अपना पक्ष हलफनामे के जरिए रखने का मौका दिया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल के मुख्य सचिवों को भी नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा कि प्रदर्शन से जुड़े सभी CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस रिकॉर्ड और दूसरे सबूत सुरक्षित रखे जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों, खासकर छात्रों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि दर्ज एफआईआर की जांच जारी रह सकती है, लेकिन प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह राहत उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया आदेश?

इसके अलावा कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन के दौरान पकड़े गए 18 साल से कम उम्र के ऐसे बच्चों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। जरूरत पड़ने पर उन्हें साधारण बॉन्ड पर छोड़ा जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।

ये भी पढ़ें:
मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की सरकार को दिया झटका, करूर भगदड़ में मृतकों के परिवारों को नहीं मिलेगी 'दया के आधार पर नौकरी'

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत