नई दिल्ली। मकर संक्रांति के दिन से प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ) का पता बदल रहा है। इसी के साथ ही पीएमओ का नाम भी बदल गया है। पीएमओ को अब सेवा तीर्थ नाम से जाना जाएगा। नया प्रधानमंत्री कार्यालय एक ओपन फ्लोर डिज़ाइन पर बना है। बंद केबिन के बजाय, अधिकारी अब एक साथ बैठकर काम करते देखे जाएंगे। जिनका मकसद सहयोग और तेज़ समन्वय को बढ़ावा देना है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस डिज़ाइन का मकसद यह बदलना है कि लोग सिस्टम के अंदर कैसे बातचीत करते हैं और पुरानी इमारत के साथ आने वाली औपचारिकता की परतों को कम करना है।
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सेवा तीर्थ में क्या है खास
सेवा तीर्थ को शुरू से ही एन्क्रिप्टेड संचार प्रणालियों, उन्नत साइबर सुरक्षा नेटवर्क और एकीकृत सुरक्षा वास्तुकला के साथ बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह इमारत भूकंप प्रतिरोधी है और सभी परिस्थितियों में चालू रहने के लिए डिज़ाइन की गई है। एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त सुविधा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) परिसर के भीतर 'इंडिया हाउस' के नाम से जानी जाने वाली एक आधुनिक कॉन्फ्रेंस सुविधा है। इसे उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठकों, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और प्रेस बातचीत के लिए डिज़ाइन किया गया है। PMO के भीतर पहले ऐसी कोई समर्पित जगह नहीं थी, जिसके लिए अलग-अलग जगहों पर कई व्यवस्थाएं करनी पड़ती थीं।
सेवा तीर्थ में कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय
सेवा तीर्थ सिर्फ PMO का नया पता नहीं है। यह शासन के उच्चतम केंद्रों को एक ही परिसर में एक साथ लाता है। सेवा तीर्थ वन में PMO, सेवा तीर्थ टू में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ थ्री में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय है। पुरानी प्रणाली में, ये संस्थान अलग-अलग जगहों से काम करते थे, जिससे अक्सर संवेदनशील मामलों पर समन्वय धीमा हो जाता था। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बना सेवा तीर्थ यह दिखाता है कि शासन सिर्फ़ जगहें नहीं बदल रहा है, बल्कि यह भी तय कर रहा है कि सत्ता का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा।
पुराने ऑफिस बनेगा म्यूज़ियम
एक बार जब PMO पूरी तरह से साउथ ब्लॉक खाली कर देगा, तो ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को एक पब्लिक म्यूज़ियम, संग्रहालय में बदल दिया जाएगा।