पूर्व सांसद डीपी यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 30 साल पुराने पूर्व विधायक महेंद्र भाटी हत्याकांड में डीपी यादव को बरी करने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिछले साल नवंबर में निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए डीपी यादव को बाइज्जत बरी किया था।
क्या है पूरा मामला-
गौरतलब है कि 13 सितंबर 1992 को गाजियाबाद के पूर्व विधायक महेंद्र भाटी की दादरी रेलवे क्रासिंग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीबीआई की चार्जशीट में पूर्व सांसद डीपी यादव को आरोपी बनाया गया था। 15 फरवरी 2015 को सीबीआई कोर्ट ने चार्जशीट के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी।
इसके बाद डीपी यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद और विरोधियों द्वारा उनकी राजनीतिक हत्या करने की एक और घिनौनी कोशिश बताते हुए सीबीआई कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में सालों तक सुनवाई चली थी।
10 नवंबर 2021 को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर.एस. चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने डीपी यादव की अपील पर अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अदालत के सामने ऐसा कोई भी ठोस सुबूत नहीं प्रस्तुत कर पाया जिससे डीपी यादव पर लगे आरोप साबित हो सकें। इसी के साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए डीपी यादव को इस मामले में बाइज़्ज़त बरी कर दिया।
उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और इसको लेकर एक विशेष अवकाश याचिका भी दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करने के पश्चात् 11 अप्रैल 2022 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश- न्यायमूर्ति संजीव खन्ना एवं न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले को बरक़रार रखते हुए सीबीआई की अपील ख़ारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश में माननीय उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फ़ैसले में दख़ल देने का कोई ठोस आधार एवं कारण नहीं है।