Wednesday, February 04, 2026
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'विधवा पुत्रवधू अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण पाने की है हकदार', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

कोर्ट ने कहा कि हमारा स्पष्ट मत है कि मृत हिंदू व्यक्ति के 'पुत्र की कोई विधवा' अधिनियम की धारा 21 (7) के अर्थ में आश्रित है। कोर्ट में विधवा गीता शर्मा ने अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण के लिए अर्जी दी थी।

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Jan 13, 2026 11:43 pm IST, Updated : Jan 13, 2026 11:45 pm IST
सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PTI सांकेतिक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि हिंदू कानून के तहत यदि कोई महिला अपने ससुर की मृत्यु के बाद विधवा हो जाती है, तो वह उसकी संपत्ति से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार है। जज पंकज मिथल और एसवीएन भट्टी की पीठ ने फैसला सुनाया कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) 1956 के तहत महिला को 'आश्रित' का दर्जा देने के लिए पति की मृत्यु का समय (चाहे वह ससुर की मृत्यु से पहले हो या बाद में) 'अप्रासंगिक' है। 

अधिनियम की धारा 22 के तहत भरण-पोषण का दावा

फैसला सुनाने वाले जज मिथल ने निष्कर्षों को सरल शब्दों में बताते हुए कहा, 'मृत हिंदू के सभी उत्तराधिकारी उसकी संपत्ति से प्राप्त धन/संपत्ति से उसके आश्रितों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य हैं।' कोर्ट ने कहा, 'हमारा स्पष्ट मत है कि मृत हिंदू व्यक्ति के 'पुत्र की कोई विधवा' अधिनियम की धारा 21 (सात) के अर्थ में आश्रित है और अधिनियम की धारा 22 के तहत भरण-पोषण का दावा करने की हकदार है।' 

आश्रित व्यक्तियों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य

इसमें कहा गया है कि पुत्र या कानूनी वारिस विरासत में मिली संपत्ति में से सभी आश्रित व्यक्तियों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य हैं; अर्थात, वे सभी व्यक्ति जिनका भरण-पोषण करने के लिए मृत व्यक्ति कानूनी और नैतिक रूप से बाध्य था। 

 ससुर का कर्तव्य वह उसका भरण-पोषण करे

पीठ ने कहा, ‘अत: पुत्र की मृत्यु के बाद अगर विधवा पुत्रवधू स्वयं या मृतक पुत्र द्वारा छोड़ी गई संपत्ति के माध्यम से अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हो तो ससुर का यह कर्तव्य है कि वह उसका भरण-पोषण करे। इसमें कहा गया है, 'इस अधिनियम में ससुर के अपनी विधवा पुत्रवधू के भरण-पोषण के उपरोक्त दायित्व को समाप्त करने का प्रावधान नहीं है, चाहे वह ससुर की मृत्यु से पहले या बाद में विधवा हुई हो।' 

ये है मामला

यह मामला दिवंगत महेंद्र प्रसाद की संपत्ति से जुड़े पारिवारिक विवाद से उत्पन्न हुआ है। प्रसाद का दिसंबर 2021 में निधन हो गया था। उनके बेटों में से एक रणजीत शर्मा का मार्च 2023 में निधन हो गया। रणजीत की मृत्यु के बाद उनकी विधवा, गीता शर्मा ने परिवार न्यायालय में अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण के लिए अर्जी दी। 

फैमिली कोर्ट ने शुरू में उसकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह अपने ससुर की मृत्यु की तारीख पर विधवा नहीं थी और इसलिए आश्रित के रूप में योग्य नहीं थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया, जिसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

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