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'ऐसे तो फिर महिलाओं को कोई जॉब नहीं देगा', मेन्स्ट्रुअल लीव पर याचिका को SC ने किया खारिज

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Mar 13, 2026 02:09 pm IST,  Updated : Mar 13, 2026 02:17 pm IST

Menstrual Leave पर नेशनल पॉलिसी बनाने की मांग वाली PIL को सुनने से Supreme Court ने इनकार कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इसे कानूनन अनिवार्य बनाने से महिलाओं के करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

Menstrual Leave- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट में Menstrual Leave वाली याचिका खारिज। Image Source : PTI (फाइल फोटो)

Menstrual Leave Plea: सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में महिलाओं और छात्राओं के लिए Menstrual Leave पर नेशनल पॉलिसी बनाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर इसको कानून के माध्यम से अनिवार्य कर दिया गया, तो इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसकी वजह से आगे चलकर महिलाओं को नौकरी मिलने में मुश्किलें आ सकती हैं।

बढ़ सकता है Gender Stereotypes

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह अहम टिप्पणी की। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस तरह के प्रावधान से महिलाओं के बारे में अनजाने में Gender Stereotypes के और मजबूत होने की संभावना है।

संबंधित सक्षम प्राधिकरण पॉलिसी पर कर सकता है विचार

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित सक्षम प्राधिकरण इस मुद्दे पर दिए गए प्रतिनिधित्व पर विचार कर सकता है। सभी हितधारकों से सलाह लेकर Menstrual Leave पर पॉलिसी बनाने की संभावना का अध्ययन कर सकता है। इस निर्देश के साथ Menstrual Leave वाली याचिका का निपटारा कर दिया गया है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दिया था केरल का उदाहरण

जान लें कि यह याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट एम. आर. शमशाद ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश के कुछ राज्यों और संस्थानों ने पहले ही इस तरफ कदम उठाए हैं। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि केरल में स्कूलों में इसको लेकर कुछ राहत दी गई है। कई प्राइवेट कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को खुद से Menstrual Leave दे रही हैं।

स्वैच्छिक तौर पर छुट्टी देना स्वागत योग्य कदम

इस पर CJI ने कहा, 'स्वैच्छिक तौर पर दी जाने वाली छुट्टी स्वागत योग्य है, लेकिन इसे कानून के तहत अनिवार्य बनाना ठीक नहीं है। अगर इसे कानून के तौर पर अनिवार्य कर दिया गया, तो Employer महिलाओं को जॉब देने से कतराएंगे। इससे महिलाओं के करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।'

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