ऐसा पहली बार है जब देश के 29 राज्यों में से 19 राज्यों में कोई एक पार्टी सरकार चला रही है। दो राज्य हिमाचल प्रदेश और गुजरात में जीत के बाद 19 राज्यों में भाजपा सरकार चला रही है। इससे पहले आज से 24 साल पहले कांग्रेस की 18 राज्यों में सरकार थी। साढ़े तीन साल पहले भाजपा की स्थिती ऐसी थी कि मात्र पांच राज्यों में मुख्यमंत्री, एक राज्य में गठबंधन की सरकार लेकिन अब 14 राज्यों में बीजेपी के मुख्यमंत्री, पांच राज्यों मे गठबंधन की सरकार है। आख़िर कैसे? इस बात पर तमाम राजनीतिक दलों और राजनीतिशास्त्र के शोधार्थियों को शोध करना चाहिए।
साल 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद चुनाव-दर-चुनाव कांग्रेस के हाथ से 10 राज्य निकलते चले गए। भाजपा को लगातार मिलती जीत कोई रहस्य तो है नही। कहीं ना कहीं बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता अपने संगठन को मज़बूत करने के लिए ज़मीनी स्तर पर कड़ी मेहनत तो करते ही है।
बीजेपी के चुनाव प्रचार अभियान के तरीके को यदि गौर से देखा जाए तो पता चलता है कि बाकि दलों की अपेक्षा बीजेपी ज़्यादा आक्रामक दिखती है। ऐसा प्रतीत होता है बीजेपी के लिए हरेक चुनाव किसी अंतिम मौके की तरह होता है। कार्यकर्ता से लेकर तमाम केन्द्रीय मंत्रियों के साथ,अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री समेत राज्यमंत्री भी चुनाव प्रचार करते है। ताज़ा उदाहरण गुजरात है। जितनी शिद्दत से एक दल के रूप में भाजपा के नेता चुनाव के वक़्त ज़मीनी स्तर पर काम करते हैं, उतनी ही शिद्दत से उसके सहयोगी संगठनों के लोग स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करते हैं,जो भाजपा को ज़मीनी स्तर से मज़बूती प्रदान करता है।
इसी ज़मीनी स्तर की मज़बूती की कमी कांग्रेस में हमेशा दिखाई देती है। हर चुनाव में राजनीति के जानकार इस बात की तरफ़ इशारा तो करते हीं हैं, लेकिन पता नही कांग्रेस को नेता, सहयोगी संगठनों और कार्यकर्ता के बीच एकजुटता वाला मॉडल क्यूं पसंद नहीं आता है।
अब उन बुनियादी बातों के बारे में बात करते हैं, जो हर राजनीतिक दल से भाजपा को अलग और सशक्त बनाती है। जो कांग्रेस में नहीं दिखती है। जब से अमित शाह पार्टी अध्यक्ष बने है वो मतदाता सूची के हर एक पन्ने में से एक पन्ना प्रमुख को चुनते हैं। पन्ना प्रमुख की ज़िम्मेदारी होती है कि उनकी सूची में जितने मतदाता होते हैं उनको केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को समझाकर अपने पाले में लाना। इस पद्धति का जनक अमित शाह को माना जाता है।
ग्रामीण और शहरी इलाकों के हर वर्ग के लोगों में भाजपा की मज़बूत पकड़ का होना। प्रचार के दौरान बीजेपी का 'वन मैन आर्मी' ना होकर सामूहिक रूप से मेहनत करना। क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले लोकप्रिय नेताओं का होना भाजपा की मज़बूती का एक सबसे बड़ा कारण है जिसकी कमी कांग्रेस में गुजरात चुनाव में भी दिखी। प्रधानमंत्री से लेकर तमाम स्थानीय नेताओं ने गुजराती में लोगों को संबोधित किया।
एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए विपक्ष का मज़बूत होना बहुत ज़रूरी होता है और विपक्ष तब ही मज़बूत हो सकता है, जब दल के किसी एक नेता के भरोसे या उसके कार्यकर्ता उस दल के प्रमुख नेता के भरोसे काम नहीं करेंगे। ये बात बीजेपी में दिखती है, शायद इसी वज़ह से सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की सबसे बड़ी सियासी पार्टी है।
(इस ब्लॉग के लेखक आदित्य शुभम युवा पत्रकार हैं)