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कर्नाटक में फेरबदल के बाद सोशल इंजीनियरिंग पर विचार कर रही बीजेपी

 Reported By: IANS
 Published : Jul 27, 2021 05:20 pm IST,  Updated : Jul 27, 2021 05:20 pm IST

कर्नाटक में येदियुरप्पा के साढ़े चार दशक के निर्विवाद नेतृत्व के लिए उपयुक्त विकल्प खोजने की चुनौती का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है।

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भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक में विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। Image Source : PTI FILE

बेंगलुरु: कर्नाटक में येदियुरप्पा के साढ़े चार दशक के निर्विवाद नेतृत्व के लिए उपयुक्त विकल्प खोजने की चुनौती का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विकल्पों में लिंगायत वोट बैंक को बरकरार रखने के साथ-साथ अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़े समुदायों और पार्टी के लिए वोक्कालिगा वोटों को मजबूत करने के लिए नेतृत्व स्थापित करना शामिल है। मंगलवार शाम को होने वाली विधायक दल की बैठक में पार्टी सीएम पद के लिए उम्मीदवार को अंतिम रूप देने से पहले इन कारकों पर चर्चा हो सकती है।

कर्नाटक में बन सकते हैं 3 उपमुख्यमंत्री

सूत्र बताते हैं कि अगर लिंगायत उम्मीदवार को शीर्ष पद के लिए चुना जाता है, तो एससी, ओबीसी और वोक्कालिगा समुदायों को प्रतिनिधित्व देने के लिए 3 या 3 से अधिक उपमुख्यमंत्री होंगे। यदि लिंगायत के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को मौका दिया जाता है, तो येदियुरप्पा के बेटे बी.वाई. विजयेंद्र पर उपमुख्यमंत्री पद के लिए विचार किया जा सकता है। ऐसे में पार्टी सिर्फ लिंगायत वोट बैंक को मनाने के लिए एक उपमुख्यमंत्री का पद अपने पास रखेगी। यदि पार्टी लिंगायत के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को चुनती है, तो अन्य समुदाय के नेताओं को समायोजित करने के लिए 3 या अधिक उपमुख्यमंत्री पद सृजित किए जाएंगे।

लिंबावली को दी जा सकती है सूबे की कमान
पूर्व पर्यटन मंत्री सी.पी. योगेश्वर, पूर्व परिवार कल्याण मंत्री बी. श्रीरामुलु, बीजेपी के वरिष्ठ नेता वी. सुनीलकुमार का नाम उपमुख्यमंत्रियों की दौड़ में आगे बताया जा रहा है। पार्टी वरिष्ठ नेता अरविंद लिंबावली को पार्टी अध्यक्ष के रूप में स्थापित करने पर भी विचार कर रही है। उत्तरी कर्नाटक के एक दलित नेता लिंबावली बेंगलुरु में चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। पार्टी सोच रही है कि अगर किसी दलित को पार्टी प्रमुख बनाया जा रहा है और मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पदों पर अन्य समुदायों का प्रतिनिधित्व किया जा सकता है, तो यह राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के वोट बैंक को एक मजबूत झटका दे सकता है।

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