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गुजरात: पाटीदारों के 6 बड़े संगठन हार्दिक के खिलाफ, कहा-कांग्रेस रिजर्वेशन के नाम पर धोखा दे रही है

 Written By: India TV News Desk
 Published : Dec 08, 2017 08:00 am IST,  Updated : Dec 08, 2017 10:36 am IST

इन संस्‍थाओं ने हार्दिक से यह कहकर किनारा कर लिया कि हार्दिक का आंदोलन अब सामाजिक न रहते हुए राजनीतिक और निजी बन गया है। यहां तक कि इशारों ही इशारों में उन्‍होंने यह भी साफ कर दिया कि कुछ समय के लिए भाजपा से नाराजगी जरूर थी लेकिन अब सब ठीक है। अब यह

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नई दिल्ली: गुजरात में पाटीदारों के 6 बड़े  संगठन हार्दिक पटेल के खिलाफ हो गए हैं। इन संगठनों ने कहा कि कांग्रेस आरक्षण के नाम पर पाटीदारों को धोखा दे रही है। कभी हार्दिक पटेल के साथ आंदोलन में साथ खड़े रहने वाले पाटीदार नेताओं का दावा है कि हार्दिक के साथ कांग्रेस ने जो फार्मूला बनाया है उसके आधार पर कभी आरक्षण मिल ही नहीं सकता।

पाटीदार आर्गेनाइजेश्नस कमेटी ने पटेल आरक्षण पर कांग्रेस के फार्मूले की जांच करने के लिये देश और दुनिया के जाने माने वकील हरीश साल्वे से राय मांगी थी। हरीश साल्वे की राय के बाद पाटीदार नेता कांग्रेस से नाराज़ हो गये हैं। उनके मुताबिक कांग्रेस पटेलों को गुमराह कर रही है। हार्दिक पटेल के इन पूर्व सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने हरीश साल्वे से सवाल पूछा था कि क्या आर्टिकल 31C और आर्टिकल 46 के तहत पाटीदारों को आरक्षण मिल सकता है? इस पर हरीश साल्वे ने सलाह दी कि आरक्षण संभव नहीं है।

पाटीदार समाज की 6 प्रमुख संस्थाएं उमिया माताजी संस्थान-उंझा, खोडलधाम- कागवड, सरदार धाम अहमदबाद, विश्व उमिया फाउंडेशन अहमदबाद, समस्त पाटीदार समाज सूरत और उमिया माता संस्थान सिदसर हैं।

इन संस्‍थाओं ने हार्दिक से यह कहकर किनारा कर लिया कि हार्दिक का आंदोलन अब सामाजिक न रहते हुए राजनीतिक और निजी बन गया है। यहां तक कि इशारों ही इशारों में उन्‍होंने यह भी साफ कर दिया कि कुछ समय के लिए भाजपा से नाराजगी जरूर थी लेकिन अब सब ठीक है। अब यह साफ है कि समाज का एक तबका भाजपा के साथ खड़ा दिख रहा है।

पाटीदारों को आरक्षण के लिए कपिल सिब्बल ने फार्मूला निकाला था और हार्दिक ने उसमें अपनी सहमति जताई थी, लेकिन पाटीदार समाज के इस बड़े संगठन की नाराज़गी के बाद हार्दिक और कांग्रेस दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

गौरतलब है कि पाटीदारों में दो प्रमुख समुदाय लेउवा और कड़वा पाटीदार हैं। ऐसा माना जाता है कि कड़वा और लेउवा आपस में वैवाहिक संबंध नहीं रखते। इन सब बातों के अलावा यह भी नहीं भूलना चाहिए कि गुजरात के मुख्‍यमंत्री रहे केशुभाई पटेल भी पाटीदार समुदाय से आते थे। उन्होंने भी भाजपा के खिलाफ बगावत की थी, लेकिन उन्हें विधानसभा चुनाव में नाममात्र की सीटें मिली थीं।

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