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29 सालों का मिथक तोड़कर नोएडा आए योगी आदित्यनाथ, PM मोदी ने दी बधाई

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Dec 25, 2017 05:25 pm IST,  Updated : Dec 25, 2017 05:25 pm IST

पीएम मोदी ने कहा कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब उन्हें ऐसे पांच-छह स्थानों के बारे में बताया गया जहां जाने से कुर्सी चले जाने की मान्यता है...

narendra modi and yogi adityanath- India TV Hindi
narendra modi and yogi adityanath

नोएडा: उत्तरप्रदेश के पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों के नोएडा नहीं आने से जुड़े अंधविश्वास पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि अंध श्रद्धा और मान्यताओं में कैद होकर कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता और ऐसे में कहीं जाने से कुर्सी ना चली जाए, अगर मुख्यमंत्री इस डर से जीते हैं तो ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री बनने का कोई हक़ नहीं है।

दिल्ली मेट्रो की 12 किमी लंबी मेजेंटा लाइन का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देता हूं कि उन्होंने बिना बोले यहां आकर इस मिथक को तोड़ने का काम किया है। इनके कपड़ों को देखकर यह भ्रम फैलाया जाता है कि वे आधुनिक विचारों के नहीं हैं, पुरानपंथी हैं, पुरानी मान्यताओं को मानने वाले हैं। लेकिन उन्होंने इस मान्यता को तोड़ा कि अगर कोई मुख्यमंत्री यहां आए तो वह सरकार में नहीं रह सकता।

मोदी ने कहा कि कहीं जाने से कुर्सी ना चली जाए अगर मुख्यमंत्री इस डर से जीते हैं तो ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री बनने का कोई हक़ नहीं है। श्रद्धा का अपना स्थान होता है पर अंधश्रद्धा के लिए कोई स्थान नहीं है। मान्यताओं में कैद होकर कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता।

प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में गाड़ी को लेकर एक मुख्यमंत्री से जुड़ी घटना का भी जिक्र किया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि ऐसी अंध्रश्रद्धा में जीने वाले लोग सार्वजनिक जीवन में बहुत अहित करते हैं। उन्होंने कहा कि जब वे (मोदी) गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब उन्हें ऐसे पांच-छह स्थानों के बारे में बताया गया जहां जाने से कुर्सी चले जाने की मान्यता है। मैंने उनसे कहा कि पहले साल में इन्हीं स्थानों की यात्रा पूरी की जाए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम विकास की बात करते हैं तब हमारा आशय होता है कि विकास सर्वसमावेशी हो, विकास सर्वस्पर्शी हो, विकास सार्वदेशिक हो, विकास का आशय सबका साथ, सबका विकास एवं सबकी भागीदारी के मंत्र से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि विकास आने वाली पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखकर होना चाहिए।

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