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उत्तर के बाद अब दक्षिण में परचम लहराना चाहेगी BJP, 2026 में इन 2 राज्यों पर होगी खास नजर

 Published : Dec 24, 2025 04:54 pm IST,  Updated : Dec 24, 2025 04:54 pm IST

उत्तर भारत में लगातार चुनावी सफलताओं के बाद बीजेपी अब 2026 के तमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनावों पर फोकस कर रही है। इन दोनों राज्यों में बीजेपी का अच्छा प्रदर्शन भविष्य में पार्टी को दक्षिण भारत में बढ़त हासिल करने में मदद कर सकता है।

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बीजेपी ने 2025 में विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया। Image Source : PTI FILE

BJP expansion in South India: 2024 के लोकसभा चुनावों और 2025 में दिल्ली एवं बिहार में हुए विधानसभा चुनावों के बाद भारतीय राजनीति का रुख एक बार फिर साफ दिखाई देने लगा है। उत्तर भारत में अपनी मजबूत पकड़ को और पुख्ता करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की नजर देश के दक्षिणी राज्यों पर टिकी है। खासतौर पर 2026 में होने वाले तमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी ने अभी से रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है। ये दोनों राज्य लंबे समय से बीजेपी के लिए कठिन चुनौती बने रहे हैं और ये विपक्ष के सबसे मजबूत किले माने जाते हैं।

2025 में आए नतीजों से बढ़ा है आत्मविश्वास

2025 बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम साल रहा। इस साल हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी ने उत्तर भारत में अपनी स्थिति पहले से भी ज्यादा मजबूत कर ली। एक तरफ जहां बीजेपी ने दिल्ली की सत्ता में लंबे समय के बाद वापसी की, वहीं बिहार में अपनी स्थिति को और पुख्ता किया। वहीं, 2024 के अंतिम महीनों में हुए महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने धमाकेदार जीत दर्ज करके पहले ही अपनी स्थिति काफी पुख्ता कर ली थी। इन सारी जीतों ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि विरोधियों को यह संकेत भी दिया है कि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा, चुनाव प्रबंधन और नेतृत्व अभी भी पूरी तरह प्रभावी है।

आखिर अब दक्षिण पर क्यों है बीजेपी की नजर?

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर भारत के कई राज्यों में अपने विरोधियों पर अच्छी-खासी बढ़त हासिल कर ली है, लेकिन पार्टी केवल ‘हिंदी पट्टी’ तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी नेतृत्व मानता है कि अगर राष्ट्रीय राजनीति में लंबे समय तक बढ़त बनाए रखनी है, तो दक्षिण भारत में पैठ बनाना जरूरी है। दक्षिण में बीजेपी का एकमात्र मजबूत किला कर्नाटक माना जाता है और फिलहाल पार्टी वहां भी सत्ता से दूर ही है। यही वजह है कि 2026 के चुनावों को लेकर पार्टी ने अभी से रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। अगर बीजेपी दक्षिणी राज्यों में अच्छी-खासी सेंध लगाने में सफल हो जाती है तो आने वाले समय में लोकसभा में बहुमत के लिए उत्तरी राज्यों पर उसकी निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।

तमिलनाडु में बीजेपी के लिए क्या संभावनाएं हैं?

तमिलनाडु की राजनीति दशकों से द्रविड़ पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी कि DMK और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी कि AIADMK यहां की मुख्य राजनीतिक ताकतें रही हैं। मौजूदा समय में DMK सत्ता में है और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन आसानी से सूबे पर अपनी पकड़ छोड़ते नहीं दिख रहे। वहीं, AIADMK फिलहाल अंदरूनी कलह से जूझ रही है ऐसे में बीजेपी के साथ आने के बावजूद उसके सियासी भविष्य पर कुछ भी पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता। यही वजह है कि तमिलनाडु की राजनीति में एक बहुत बड़ा वैक्यूम नजर आने लगा है जिसे भरने के लिए कई पार्टियां जोर-आजमाइश कर रही हैं।

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Image Source : PTI FILEबीजेपी केरल और तमिलनाडु में अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार करती जा रही है।

जहां तक बीजेपी का सवाल है, तो उसके लिए तमिलनाडु हमेशा से कठिन रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने यहां अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश की है। 2024 और 2025 के चुनावी अनुभवों से बीजेपी को यह समझ में आया है कि बिना मजबूत स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय मुद्दों की समझ के यहां सफलता मुश्किल है। इसलिए 2026 से पहले पार्टी का फोकस सहयोगी दलों के साथ तालमेल, स्थानीय चेहरों को आगे लाने और सांस्कृतिक मुद्दों पर संतुलित राजनीति करने पर रह सकता है। बीजेपी जानती है कि तमिलनाडु में सीधे सत्ता में आना आसान नहीं है, लेकिन वोट शेयर बढ़ाकर और विधानसभा में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराकर वह अगले कुछ सालों में सूबे में बड़ी सियासी ताकत बन सकती है।

केरल में BJP कर रही सेंध लगाने की कोशिश

जहां तक केरल की बात है तो वहां की राजनीति तमिलनाडु से अलग है। यहां मुख्य मुकाबला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के बीच रहा है। मौजूदा समय में वाम मोर्चा सत्ता में है और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में सरकार चल रही है। बीजेपी के लिए केरल वैचारिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण राज्य है। यहां की राजनीति में वामपंथ और धर्मनिरपेक्षता की गहरी जड़ें हैं। हालांकि, 2025 के बाद बीजेपी को यह भरोसा हुआ है कि लगातार प्रयास और जमीनी काम के जरिए यहां भी आधार बनाया जा सकता है। पिछले कुछ चुनावों में पार्टी ने केरल में अपना वोट प्रतिशत धीरे-धीरे बढ़ाया है, और 2024 के लोकसभा में भी एक सीट जीती है।

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Image Source : PTI FILEतमिलनाडु में एमके स्टालिन और केरल में पिनाराई विजयन सत्ता पर अपनी पकड़ बरकरार रखने की कोशिश कर रहे हैं।

खास बात यह है कि 2025 के अंत में हुए केरल स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने अपनी स्थिति को और मजबूत ही किया है। तिरुवनंतपुरम नगर निकाय चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है और इतिहास में पहली बार केरल की राजधानी का मेयर बीजेपी से होगा। 2026 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी सामाजिक मुद्दों, विकास और भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर फोकस कर सकती है। पार्टी का मानना है कि अगर वह शहरी इलाकों और युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर लेती है, तो केरल में भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

बीजेपी की सियासी मजबूती तय करेंगे दोनों राज्य

2025 में विधानसभा चुनावों में अजेय रहकर बीजेपी ने दिखा दिया है कि केवल चुनावी भाषणों से नहीं, बल्कि लंबे समय तक संगठन मजबूत करने से ही सफलता मिलती है। तमिलनाडु और केरल दोनों में पार्टी का जोर बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, स्थानीय मुद्दों को समझने और क्षेत्रीय पहचान का सम्मान करने पर दिख रहा है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को दक्षिणी राज्यों से जोड़ना भी रणनीति का अहम हिस्सा होगा। बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि वह सिर्फ उत्तर भारत की पार्टी नहीं, बल्कि पूरे देश की पार्टी है। 2025 की जीतों से मिले आत्मविश्वास के साथ पार्टी दक्षिण में परचम लहराने की पूरी कोशिश करेगी, भले ही रास्ता कठिन और चुनौतियों से भरा हो।

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