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असम विधानसभा चुनाव: दलबदल से कांग्रेस परेशान, क्या गौरव गोगोई हैं चुनौती के लिए तैयार?

 Published : Mar 16, 2026 11:41 am IST,  Updated : Mar 16, 2026 11:53 am IST

असम विधानसभा चुनाव की तारीख जारी हो चुकी है। इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबले भाजपा और कांग्रेस के बीच होने जा रहा है। हालांकि, चुनावी तैयारियों के दौरान कांग्रेस दलबदल से परेशान चल रही है।

Assam assembly election 2026- India TV Hindi
असम विधानसभा चुनाव 2026 Image Source : PTI

असम में विपक्षी पार्टी कांग्रेस दलबदल की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में उसे आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी को चुनौती देने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस 2016 से सत्ता से बाहर है। उसे बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक आधार, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के सक्रिय नेतृत्व और मौजूदा बीजेपी सरकार द्वारा शुरू की गई विकास और कल्याणकारी योजनाओं का मुकाबला करना होगा।

कांग्रेस को किनसे मिलेगा फायदा?

असम में कांग्रेस की स्थिति का विश्लेषण करें तो राज्य में सत्ता-विरोधी लहर कांग्रेस के पक्ष में जा सकती है। पार्टी को अल्पसंख्यक मतदाताओं, खासकर बंगाली भाषी मुसलमानों के समर्थन का फायदा मिल सकता है। बता दें कि 2024 में सत्ताधारी बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी थी। बावजूद जोरहाट लोकसभा सीट से गौरव गोगोई का बड़े अंतर से जीतना और इस बार कांग्रेस द्वारा उन्हें फिर से मुख्यमंत्री पद का चेहरे पेश करना, पार्टी का मनोबल बढ़ाएगा।

कई नेताओं ने छोड़ा कांग्रेस का साथ

पिछले एक दशक में असम में कांग्रेस को कई झटके लगे। मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा समेत कई नेताओं ने हाथ का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया। हालिया झटका, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा और तीन अन्य विधायकों का भगवा पार्टी में शामिल होना था। कांग्रेस में एकजुट संगठनात्मक ढांचे की कमी भी उसके खिलाफ जा सकती है, खासकर जमीनी स्तर पर। ये बात 2014 के बाद से हुए विधानसभा और संसदीय चुनावों के दौरान चाय बागानों के मजदूरों के पाला बदलने से बहुत साफ होती है। ये मजदूर कभी कांग्रेस का महत्वपूर्ण वोट बैंक हुआ करते थे, लेकिन अब उनका झुकाव बीजेपी की ओर हो गया है।

कांग्रेस के लिए मौका 

कांग्रेस के लिए ये मौका है कि वो सत्ता-विरोधी लहर का फायदा उठाकर जनादेश अपने पक्ष में कर ले। पार्टी सत्ताधारी एनडीए गठबंधन में मौजूद असंतुष्ट तत्वों का भी फायदा उठा सकती है और उन्हें अपने खेमे में शामिल कर सकती है। प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं का लगातार पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए एक खतरा बना हुआ है, जिसका बुरा असर पड़ता है। सत्ताधारी एनडीए की संगठनात्मक और प्रशासनिक मशीनरी भी असम में कांग्रेस के लिए चुनौती पेश करेगी।

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