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यूपी में अखिलेश को बड़ा झटका, सपा छोड़कर भाजपा में गए नारद राय, जानिए कौन हैं ये दिग्गज नेता

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : May 30, 2024 12:03 am IST,  Updated : May 30, 2024 06:19 am IST

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान अभी बाकी है और नतीजे भी चार जून को आने वाले हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, पार्टी के दिग्गज नेता नारद राय ने भाजपा ज्वाइन कर लिया है। जानिए कौन हैं नारद राय?

narad rai- India TV Hindi
सपा छोड़ भाजपा में गए नारद राय Image Source : FILE PHOTO

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण की वोटिंग एक जून को होने वाली है इससे पहले समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में बड़ा झटका लगा है। बलिया के दिग्गज नेता नारद राय ने सपा से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। बता दें कि नारद राय का यूपी की राजनीति में बड़ा रसूख है और वे बीते चार दशक से भी ज्यादा समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। नारद राय भूमिहारों के बड़े नेता माने जाते हैं और वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी लोगों में शामिल रहे हैं।

 नारद राय ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली और उसके बाद एक्स पर पोस्ट कर भाजपा के साथ जाने का ऐलान किया। नारद राय ने कहा, "बहुत भारी और दुखी मन से मैं समाजवादी पार्टी छोड़ रहा हूं। 40 साल का साथ आज छूट गया है। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते ही नारद राय ने कहा, "अब मैं अपनी पूरी ताकत भाजपा के लिए लगाऊंगा और जितना हो सकेगा उतनी ताकत से बीजेपी को जिताने की कोशिश करूंगा।" 

इस वजह से नाराज थे नारद 

नारद राय ने कहा कि अखिलेश यादव ने मुझे बेइज्जत किया। इसमें मेरी गलती यह है कि अखिलेश और मुलायम सिंह में से मैंने मुलायम सिंह यादव को चुना था। उन्होंने कहा पिछले सात सालों से लगातार मुझे बेइज्जत किया गया। अखिलेश यादव ने 2017 में मेरा टिकट काटा, 2022 में टिकट दिया लेकिन साथ-साथ मेरे हारने का इंतजाम भी कर दिया था।"    

बता दें कि नारद राय यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा छोड़ बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और हार गए थे। हारने के बाद 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में नारद राय फिर से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और फिर से हार गए। तब से ही समाजवादी पार्टी में नारद राय की उपेक्षा की खबरें आती रहीं।

इस चुनाव में 26 मई को बलिया लोकसभा क्षेत्र से सपा उम्मीदवार सनातन पाण्डेय के समर्थन में कटरिया में आयोजित चुनावी जनसभा के मंच पर नारद राय मौजूद तो थे, मगर सपा चीफ अखिलेश यादव ने अपने सम्बोधन में उनका नाम तक नहीं लिया, इसी बात से नाराज होकर उन्होंने सपा से नाता तोड़ने का फैसला कर लिया था।

कितनी है संपत्ति और कहां तक की है  पढ़ाई 

एक वेबसाइट की खबर के मुताबिक नारद राय करीब 12 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। उनके पास 18 लाख रुपये का सोना और उनकी पत्नी के पास 27 लाख रुपये का गोल्ड है। दोनों के पास 49 लाख से भी ज्यादा के आभूषण हैं। नारद राय के पास बलिया और बक्सर में 40 लाख रुपये की खेती योग्य जमीन है। इसके अलावा लखनऊ में उनके नाम पर दो और पत्नी के नाम पर एक गैर कृषि भूमि है। इन तीनों की कीमत 4,89,18,000 रुपये आंकी गई है।

नारद राय के पास बलिया में दो और वाराणसी में एक घर है। वहीं, उनकी पत्नी के नाम पर भी वाराणसी में एक घर है। इन चारों घरों की कीमत 5 करोड़ 85 लाख रुपये आंकी गई है। पढ़ाई की बात करें तो नारद राय ने साल 1983 में मुरली मनोहर टाउन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, गोरखपुर विश्वविद्यालय से एग्रीकल्चर में एमएससी तक की शिक्षा ग्रहण की है।  

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