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चिदंबरम ने पूछा- BRICS से क्या मिला? थरूर ने दिया जवाब, गिना दिए भारत को मिलने वाले फायदे

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 11, 2026 02:43 pm IST,  Updated : Sep 11, 2026 02:43 pm IST

BRICS को लेकर कांग्रेस में मतभेद सामने आए हैं। पी. चिदंबरम ने हालिया सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस फायदों पर सवाल उठाया, जबकि शशि थरूर ने BRICS को ग्लोबल साउथ का अहम मंच बताया। थरूर ने भारत की कूटनीतिक पहुंच, मेजबानी के महत्व और व्यापारिक चुनौतियों को भी रेखांकित किया।

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कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम और शशि थरूर। Image Source : PTI

Highlights

  • चिदंबरम ने BRICS से भारत को मिलने वाले ठोस फायदों पर सवाल उठाया था।
  • शशि थरूर ने BRICS की वैश्विक भूमिका और भारत की कूटनीतिक ताकत गिनाई।
  • शशि थरूर ने BRICS देशों के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को भी चिंता का विषय बताया।

नई दिल्ली: BRICS को लेकर कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने हाल ही में सवाल उठाया था कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को आखिर कितने ठोस फायदे मिले हैं। अब उनकी ही पार्टी के सांसद शशि थरूर ने BRICS के महत्व और भारत को इससे होने वाले कुछ फायदों को गिनाया है। हालांकि, थरूर ने इसके साथ समूह के सामने मौजूद चुनौतियों और भारत के व्यापार घाटे का भी जिक्र किया।

थरूर ने बताया BRICS क्यों है महत्वपूर्ण

दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन से पहले शशि थरूर ने कहा कि BRICS ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश इन देशों की विविधता और अलग-अलग विचारों को काफी हद तक सामने रखते हैं। थरूर के मुताबिक, BRICS के 11 देश दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक GDP में उनकी हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत है। उन्होंने कहा,

'यह कोई छोटी बात नहीं है और दुनिया के बाकी देशों को भी इस समूह को गंभीरता से लेना पड़ता है।'

भारत के लिए BRICS की मेजबानी क्यों खास?

थरूर ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी को भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में BRICS देशों के अलावा कुछ पर्यवेक्षक देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के नेता भी शामिल होंगे। उनके मुताबिक, इतने देशों के शीर्ष नेताओं का भारत आना देश की कूटनीतिक पहुंच और अलग-अलग देशों को एक मंच पर लाने की क्षमता दिखाता है। थरूर ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की यह कूटनीतिक क्षमता अपने आप में महत्वपूर्ण है।

'लेकिन BRICS के सामने कई चुनौतियां भी'

थरूर ने यह भी साफ किया कि BRICS से सिर्फ फायदे ही नहीं जुड़े हैं, बल्कि इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग सदस्य देशों के बीच महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर एक राय बनाना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्दों पर सभी BRICS देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने ईरान युद्ध और रूस-यूक्रेन संघर्ष का जिक्र किया। थरूर ने कहा,

'मई में नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और यूएई के बीच युद्ध को लेकर मतभेद सामने आए थे। इन मतभेदों की वजह से सदस्य देश साझा बयान पर सहमत नहीं हो सके थे।'

'भारत को जारी करनी पड़ी थी चेयर की घोषणा'

थरूर ने कहा कि विदेश मंत्रियों की पिछली बैठक में BRICS देशों के बीच साझा घोषणा पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर अपनी ओर से चेयर की घोषणा जारी की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आगामी सम्मेलन में भी ऐसा ही होगा? थरूर के मुताबिक, अगर फिर से साझा बयान पर सहमति नहीं बनती है तो कुछ लोग इसे BRICS के लिए झटका और समूह के भीतर बुनियादी असहमति का संकेत मान सकते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के मतभेदों को संभालना और उनके बीच सहमति बनाना भारतीय राजनयिकों के सामने बड़ी चुनौती होगी।

BRICS देशों के साथ भारत का व्यापार भी चिंता का विषय

थरूर ने भारत और BRICS देशों के बीच व्यापार को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन भारत के नजरिए से तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है। उन्होंने कहा कि BRICS देशों को भारत का निर्यात घटा है, जबकि इन देशों से भारत का आयात बढ़ गया है। यानी व्यापार बढ़ने के बावजूद भारत के लिए व्यापार संतुलन नुकसान की दिशा में जा रहा है।

BRICS पर चिदंबरम ने क्या कहा था?

इससे एक दिन पहले पी. चिदंबरम ने BRICS सम्मेलनों से भारत को मिलने वाले ठोस लाभों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों में उन्हें कोई खास या ठोस नतीजा नजर नहीं आया। चिदंबरम ने कहा था कि भारत BRICS के अलावा शंघाई सहयोग संगठन (SCO), G20 और QUAD जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन मंचों से भारत को वास्तव में क्या ठोस लाभ मिला है। उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को कोई ठोस फायदा या ठोस परिणाम मिला है।

BJP ने चिदंबरम पर साधा था निशाना

चिदंबरम के बयान के बाद BJP ने भी कांग्रेस नेता पर हमला बोला था। BJP ने उन्हें उन 'नाराज फूफा' लोगों में शामिल बताया था, जो भारत की प्रगति को पचा नहीं पा रहे हैं। इस तरह BRICS को लेकर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बयान सामने आए हैं। जहां चिदंबरम ने इसके सम्मेलनों से मिलने वाले ठोस नतीजों पर सवाल उठाए हैं, वहीं थरूर ने BRICS की वैश्विक भूमिका, भारत की कूटनीतिक ताकत और इसकी मेजबानी के महत्व को रेखांकित किया है। बता दें कि भारत में 12 और 13 सितंबर को BRICS समिट होने वाला है और इसमें PM नरेंद्र मोदी किस नेता से कब मिलेंगे इसका भी शेड्यूल सामने आ गया है। (PTI और ANI से इनपुट्स के साथ)

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