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Women Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण बिल पर सपा ने खेला मुस्लिम कार्ड, अमित शाह ने लगाई क्लास

 Written By: Deepak Kumar
 Published : Apr 17, 2026 11:09 am IST,  Updated : Apr 17, 2026 11:09 am IST

Women Reservation Bill 2026: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर मत विभाजन से पहले सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। गृहमंत्री अमित शाह ने उनके बयान तत्काल आपत्ति जताते हुए उनके दावों को खारिज कर दिया।

Women Reservation Bill 2026: देश की राजनीति में एक बार फिर महिला आरक्षण का मुद्दा केंद्र में आ गया है। संसद में महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने से जुड़े अहम विधेयक पेश किए गए हैं, जिनके तहत यह प्रावधान वर्ष 2029 से लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस कदम को भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही संसद में तीखी बहस भी देखने को मिल रही है।

मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग

जैसे ही ये विधेयक सदन में पेश किए गए, विपक्षी दलों ने सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी से सांसद धर्मेंद्र यादव ने यह मांग रखी कि महिला आरक्षण के भीतर भी मुस्लिम और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित किया जाए। विपक्ष का तर्क है कि बिना उप-वर्गीकरण के यह आरक्षण सभी वर्गों की महिलाओं तक समान रूप से नहीं पहुंच पाएगा।

गृहमंत्री ने सपा को दे डाली नसीहत 

इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने विपक्ष पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि, 'यदि समाजवादी पार्टी को वास्तव में मुस्लिम महिलाओं की इतनी चिंता है, तो वह अपने पार्टी टिकटों में उन्हें प्राथमिकता दे सकती है।' उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल और अधिक गर्म हो गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

पीएम मोदी ने समझाया बिल का महत्व

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर विस्तार से अपनी बात रखी। अपने संबोधन में उन्होंने इस विधेयक को देश की लोकतांत्रिक संरचना को मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को नीति निर्धारण की प्रक्रिया में शामिल करना समय की आवश्यकता है और यह बिल उसी दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर उठाए सवाल

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि, 'यह प्रस्ताव कोई नया नहीं है बल्कि पिछले 25-30 वर्षों से इस पर चर्चा हो रही है।' उन्होंने सवाल उठाया कि, 'जब यह विचार पहले सामने आया था, तब इसे लागू क्यों नहीं किया गया ?' उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक दल केवल अपनी सीटों के नुकसान के डर से इस बिल का विरोध कर रहे हैं। पीएम मोदी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि, 'पंचायत स्तर पर महिला आरक्षण को सभी ने स्वीकार किया है और वहां इसका सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिला है। ऐसे में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को समान अवसर देने में हिचक क्यों हो रही है ?' उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, 'जो भी इस बिल का विरोध करेगा, उसे आने वाले चुनावों में इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।'

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