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SIR पर सियासी घमासान के बीच विपक्ष को निर्मला सीतारमण की दो टूक, "शिकायत है तो अदालत जाएं, अपना पक्ष रख सकते हैं"

 Written By: Malaika Imam
 Published : Oct 26, 2026 03:39 pm IST,  Updated : Oct 26, 2026 03:58 pm IST

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने SIR प्रक्रिया का विरोध कर रहे विपक्षी दलों से कहा कि वे न्याय पाने के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं और अपना पक्ष रख सकते हैं।

Nirmala sitharaman- India TV Hindi
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण Image Source : PTI

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर शिकायत करने वाले विपक्षी दल न्याय पाने के लिए अदालतों का रुख कर सकते हैं और वहां अपना पक्ष रख सकते हैं। SIR प्रक्रिया के विरोध में विपक्षी दलों के लगातार प्रदर्शन और मुख्य निर्वाचन अधिकारी से कार्रवाई की मांग के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा कि देशभर से मिली शिकायतों को अदालतों ने संज्ञान में लिया है। इनमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है।

उन्होंने कहा, "लोग अदालती कार्यवाही में हिस्सा ले सकते हैं, अपना पक्ष रख सकते हैं और अदालतों के माध्यम से न्याय पा सकते हैं। कई लोग पहले से ही ऐसा कर रहे हैं।" सीतारमण ने आगे कहा कि विपक्षी दल राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के जरिए भी इस मुद्दे को उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।

महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा नाम हटाने का मामला

बता दें कि महाराष्ट्र में SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करने पर सहमति जताई और केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।

याचिका के अनुसार, महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए हैं। राज्य में कुल करीब 9.79 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से हटा दिए गए हैं। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, कुल 9,78,54,049 पंजीकृत मतदाताओं में से 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम हटाए गए। यह कुल मतदाताओं का करीब 21.14 प्रतिशत है। बताया गया कि SIR प्रक्रिया के दौरान ये मतदाता अपने पते पर नहीं मिले।

मुंबई-पुणे में पुनर्विकास के कारण परेशानी का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मुंबई और पुणे में पुनर्विकास कार्यों के चलते कई लोग अस्थायी रूप से दूसरी जगह रहने चले गए थे। ऐसे मतदाताओं के नाम भी सूची से हटा दिए गए, क्योंकि सत्यापन के दौरान वे अपने पुराने पते पर नहीं मिले। याचिका में यह भी दावा किया गया कि करीब 1.22 करोड़ अन्य मतदाताओं के नाम कथित तौर पर 'तार्किक विसंगतियों' के आधार पर हटाए गए हैं।

याचिका में क्या मांग की गई?

चार्टर्ड अकाउंटेंट और पत्रकार अरुण आनंदगिरि ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को चुनौती दी है। याचिका में मांग की गई है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक राज्य में SIR की प्रक्रिया रोक दी जाए। साथ ही, जिन मतदाताओं के नाम पुनरीक्षण से पहले की मतदाता सूची में शामिल थे, उनके नाम अदालत के फैसले तक नहीं हटाए जाएं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।

(इनपुट- PTI)

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