श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने शुक्रवार को सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। नौ दिवसीय सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर की 4 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव भी हुए। शोर-शराबे की हल्की-फुल्की घटनाओं को छोड़कर, सदन की कार्यवाही काफी हद तक सुचारु रूप से चली और निर्धारित कामकाज निपटाया गया। 5 सरकारी विधेयक पारित करने के अलावा, विधानसभा ने 2 गैर-सरकारी प्रस्तावों पर भी चर्चा की।
सत्र के दौरान 41 गैर-सरकारी विधेयक सूचीबद्ध थे, लेकिन उनमें से केवल 8 पर ही चर्चा हो सकी। जिन गैर-सरकारी विधेयकों पर चर्चा हुई, वे सभी या तो सरकार के आश्वासन के बाद वापस ले लिए गए या प्रारंभिक चरण में ही ध्वनिमत से खारिज कर दिए गए। केंद्र शासित प्रदेश में बाढ़ पीड़ितों के मुद्दे पर चर्चा के लिए उधमपुर से विधायक पवन गुप्ता की ओर से प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद विपक्षी दल BJP के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही के संचालन में सहयोग के लिए सभी सदस्यों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
वहीं, एक अन्य खबर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा नहीं होने को खराब प्रदर्शन का बहाना नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि निर्वाचित सरकार के पास सभी शक्तियां हैं। सिन्हा ने SKICC में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा है कि पहले परिसीमन, उसके बाद विधानसभा चुनाव और फिर उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।
उपराज्यपाल ने कहा, ‘लेकिन कुछ लोगों को कुछ समस्याएं हैं। जब विधानसभा चुनाव हुआ था, तो यह स्पष्ट था कि चुनाव केंद्र शासित प्रदेश विधानसभा के लिए हो रहा है। सरकार यह बहाना नहीं बना सकती कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने तक काम नहीं किया जा सकता।’ सिन्हा ने कहा कि निर्वाचित सरकार के पास सभी शक्तियां हैं और राज्य का दर्जा न होने के बहाने लोगों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर के लोगों की बेहतरी के लिए करना चाहिए।
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