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पूर्व मंत्री और उनकी पत्नी को हुई 7 साल की कैद, पूरा मामला जानकर उड़ जाएंगे होश

 Published : Aug 30, 2025 11:03 pm IST,  Updated : Aug 30, 2025 11:03 pm IST

पूर्व मंत्री और उनकी पत्नी मेनन एक्का को रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने अवैध जमीन खरीद मामले में 7 साल की सजा सुनाई है। यह मामला सीएनटी एक्ट के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें आदिवासी जमीनों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए गए हैं।

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झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का। Image Source : PTI FILE

रांची: झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन एक्का को रांची की एक विशेष CBI अदालत ने अवैध जमीन खरीद के मामले में 7-7 साल की कठोर सजा सुनाई है। यह मामला छोटा नागपुर टेनेंसी (CNT) एक्ट के उल्लंघन से जुड़ा है, जो अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) की जमीन की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। अदालत ने इस मामले में अन्य आरोपियों को भी सजा सुनाई है।

क्या है यह पूरा मामला?

CBI के मुताबिक, एनोस एक्का ने 2006 से 2008 के बीच अपनी पत्नी मेनन एक्का के नाम पर रांची में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी। इस दौरान उन्होंने 1.18 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम खर्च की। ये जमीनें अनुसूचित जनजातियों के लोगों से खरीदी गईं, जो CNT एक्ट के तहत संरक्षित थीं। इस कानून का उल्लंघन करते हुए, एनोस और मेनन ने फर्जी पते का इस्तेमाल करके जमीनें हासिल कीं। इन जमीनों में हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़, नगरी में 4 एकड़ और चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल जमीन शामिल हैं। यह खरीद मार्च 2006 से मई 2008 के बीच की गई।

अन्य आरोपियों को भी सजा

अदालत ने पूर्व रांची भूमि सुधार उप-कलेक्टर (LRDC) कार्तिक प्रभात और दो अन्य आरोपियों, मनीलाल महतो और ब्रजेश्वर महतो को 5-5 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा, 5 अन्य आरोपियों- राज किशोर सिंह, फिरोज अख्तर, बृजेश मिश्रा, अनिल कुमार और परशुराम करकेट्टा को 4-4 साल की कठोर सजा दी गई। सभी दोषियों पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अगर जुर्माना नहीं भरा गया, तो प्रत्येक को एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

कैसे हुआ यह गैरकानूनी खेल?

CBI ने बताया कि एनोस एक्का और मेनन ने प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके यह अवैध खरीद की। LRDC और उसके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों ने गलत तरीके से जमीन के ट्रांसफर की अनुमति दी। उन्होंने फर्जी दस्तावेजों और गलत रिपोर्ट्स के आधार पर मेनन के नाम पर जमीन ट्रांसफर की। सीबीआई ने इस मामले को 11 अगस्त 2010 को दर्ज किया था, जब झारखंड हाई कोर्ट ने 2008 और 2009 में दायर जनहित याचिकाओं (PIL) के आधार पर जांच का आदेश दिया था।

कोर्ट ने फैसले के दौरान क्या कहा?

शुक्रवार को रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। शनिवार को सजा का ऐलान करते हुए अदालत ने कहा कि यह मामला सीएनटी एक्ट के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा है, जो आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा करता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि दोषियों ने जानबूझकर कानून तोड़ा और फर्जीवाड़ा किया।

क्या है छोटा नागपुर टेनेंसी एक्ट?

छोटा नागपुर टेनेंसी एक्ट या CNT एक्ट एक ऐसा कानून है, जो झारखंड में आदिवासी जमीनों की सुरक्षा करता है। इसके तहत आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासियों को बेचने या हस्तांतरित करने पर सख्त पाबंदियां हैं। एनोस एक्का और उनके सहयोगियों ने इस कानून को दरकिनार करके गैरकानूनी ढंग से जमीन हासिल की। अदालत का यह फैसला आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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