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72 लॉकर काटकर करोड़ों की चोरी करने वाला कुख्यात हसन चिकना गिरफ्तार, कई राज्यों में फैला है गिरोह का नेटवर्क

 Written By: Mangal Yadav
 Published : Sep 24, 2026 07:08 pm IST,  Updated : Sep 24, 2026 07:16 pm IST

हसन चिकना की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद सोना किस वारदात से जुड़ा है, गिरोह में उसके साथ कौन-कौन लोग शामिल हैं और चोरी की संपत्ति को किन राज्यों में खपाया जाता था।

पुलिस गिरफ्त में हसन चिकना- India TV Hindi
पुलिस गिरफ्त में हसन चिकना Image Source : REPORTER

झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र से जुड़े कुख्यात अंतरराज्यीय चोर गिरोह के सरगना हसन चिकना को पश्चिम बंगाल पुलिस ने साहिबगंज जिले के बरहरवा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। उत्तर दिनाजपुर जिले की पुलिस को उसके बारे में सटीक इनपुट मिला था। इसके बाद पुलिस की करीब दो दर्जन सदस्यों वाली टीम सादे लिबास में बरहरवा स्टेशन पर तैनात थी।

हसन चिकना गुरुवार को ट्रेन से बरहरवा स्टेशन पहुंचा। जैसे ही उसने स्टेशन पर पुलिसकर्मियों की संदिग्ध गतिविधियां देखीं, उसे खतरे का अंदेशा हो गया और वह तेजी से भागने लगा। पुलिस टीम ने स्टेशन परिसर में उसका पीछा किया और जीआरपी के सहयोग से उसे घेरकर पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है।

चोरी के सोने की डिलीवरी से जुड़ा मामला

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हसन चिकना की गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल में चोरी के सोने और अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े मामले में हुई है। उसके पास से करीब 6 किलोग्राम सोना बरामद होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, बरामदगी की मात्रा और सोने के स्रोत की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से अभी नहीं की गई है।

पुलिस को सूचना मिली थी कि हसन चिकना चोरी के सोने की डिलीवरी से जुड़े एक काम को पूरा कर लौट रहा है। इसी इनपुट के आधार पर उत्तर दिनाजपुर पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी और बरहरवा स्टेशन पर जाल बिछाया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे पश्चिम बंगाल ले जाने की तैयारी की जा रही है।

बोकारो में 72 लॉकर काटकर मचाई थी सनसनी

हसन चिकना का नाम झारखंड के सबसे चर्चित बैंक लॉकर चोरी कांड से जुड़ा है। 25 दिसंबर 2017 की रात बोकारो स्थित भारतीय स्टेट बैंक की एडीएम बिल्डिंग शाखा में सेंधमारी कर उसके गिरोह ने दर्जनों लॉकर काट दिए थे। पुलिस और अदालती रिकॉर्ड से जुड़ी रिपोर्टों में 72 लॉकर काटे जाने का उल्लेख मिलता है, जबकि कुछ रिपोर्टों में बैंक के कुल 76 लॉकर प्रभावित होने की बात भी कही गई है।

गैस कटर से लॉकर काटकर चोर करोड़ों रुपये के आभूषण, नकदी, सोना और चांदी ले गए थे। विभिन्न रिपोर्टों में चोरी की रकम और संपत्ति का अलग-अलग आकलन सामने आया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 11 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और सोने-चांदी के आभूषण चोरी हुए थे। दूसरी पुलिस जांच रिपोर्ट में करीब 14 किलोग्राम सोना, 40 किलोग्राम चांदी और लगभग डेढ़ लाख रुपये नकद चोरी होने का उल्लेख है। इस वारदात ने बैंक सुरक्षा और लॉकर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद बोकारो पुलिस ने गिरोह के सदस्यों की तलाश में झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों में भी छापेमारी की थी।

15 बार रेकी के बाद दिया वारदात को अंजाम

जांच में सामने आया था कि हसन चिकना और उसके साथियों ने बैंक की लंबे समय तक रेकी की थी, गिरोह ने करीब एक महीने के भीतर बैंक की लगभग 15 बार रेकी की। बैंक की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की आवाजाही, छुट्टियों और लॉकर रूम तक पहुंच की जानकारी जुटाने के बाद वारदात की योजना बनाई गई थी।

क्रिसमस की छुट्टी और बैंक बंद रहने का फायदा उठाकर गिरोह ने रात में गैस कटर और अन्य उपकरणों की मदद से लॉकर काटे। पुलिस को जांच के दौरान वह गैस सिलेंडर भी मिला था, जिसका इस्तेमाल लॉकर काटने में किए जाने की बात सामने आई थी। एक आरोपी ने पूछताछ में बताया था कि हसन चिकना ने उपकरण और अन्य सामान जुटाने के लिए उसे चार लाख रुपये दिए थे।

मुंबई से हुई थी पहली बड़ी गिरफ्तारी

बोकारो लॉकर कांड के बाद हसन चिकना फरार हो गया था। बाद में बोकारो और मुंबई पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे नवी मुंबई के नेरुल इलाके से गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में हसन चिकना सहित करीब 16 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

पुलिस जांच में यह भी पता चला था कि गिरोह चोरी के आभूषणों को ठिकाने लगाने के लिए उन्हें पिघलाकर सोने की टिकिया या ब्लॉक का रूप दे देता था। इससे चोरी के आभूषणों की पहचान और बरामदगी मुश्किल हो जाती थी। पुलिस ने मामले में कुछ आभूषण बरामद किए थे, जबकि बाकी संपत्ति के संबंध में लंबे समय तक जांच चली।

कई राज्यों में फैला है गिरोह का नेटवर्क

हसन चिकना को केवल झारखंड तक सीमित अपराधी नहीं माना जाता। उसका गिरोह बैंक लॉकर और सोना चोरी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए अलग-अलग राज्यों में सक्रिय रहा है। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज समेत अन्य स्थानों पर भी बैंक लॉकर काटने के आरोप सामने आए हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह पहले बैंक या कारोबारी प्रतिष्ठान की रेकी करता था। इसके बाद छुट्टी, त्योहार या सप्ताहांत का समय चुनकर गैस कटर और आधुनिक औजारों से शटर, ग्रिल और लॉकर काटे जाते थे। वारदात के बाद सदस्य अलग-अलग रास्तों से फरार हो जाते थे और चोरी का माल दूसरे राज्यों में पहुंचाया जाता था।

घड़ी चोरी से शुरू किया, फिर बनाया बड़ा गिरोह

साहिबगंज जिले के राजमहल-उधवा क्षेत्र के मुर्गीटोला का रहने वाला हसन चिकना अपराध की दुनिया में छोटे-मोटे चोरी के मामलों से आया। शुरुआत में वह घड़ी चोरी करता था। धीरे-धीरे उसने दूसरे अपराधियों को जोड़कर संगठित गिरोह बनाया और बैंक लॉकर काटने की घटनाओं में शामिल होने लगा।

गैस कटर से बैंक लॉकर काटने की उसकी शैली के कारण वह पुलिस रिकॉर्ड में कुख्यात हुआ। बोकारो की घटना के बाद उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ और उसे अंतरराज्यीय बैंक लॉकर चोर गिरोह का प्रमुख बताया जाने लगा।

लॉकर पीड़ितों को मुआवजे का मामला भी पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

बोकारो लॉकर कांड में पीड़ित ग्राहकों की संपत्ति को लेकर कानूनी लड़ाई भी चली। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बैंक लॉकर से सामान चोरी होने पर एक बुजुर्ग ग्राहक को 30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस फैसले ने बैंक लॉकर में रखी संपत्ति की सुरक्षा और बैंक की जवाबदेही पर देशभर में चर्चा छेड़ दी। इससे पहले अभी हाल में ही धनबाद में निखार और नीरज सिंह हत्याकांड के आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था।

रिपोर्टः कुंदन सिंह

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