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300 रुपये की रिश्वत मामले में 3 दशक से चल रहा था मुकदमा, हाईकोर्ट ने आखिरकार कम की दोषी की सजा

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Aug 28, 2026 09:34 pm IST,  Updated : Aug 28, 2026 09:38 pm IST

झारखंड हाईकोर्ट ने 300 रुपये के रिश्वत के एक मामले में दोषी की सजा कम कर दी है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता 3 दशकों तक 'मुकदमे की पीड़ा' झेल चुका है।

Jharkhand High Court- India TV Hindi
झारखंड HC ने 300 रुपये की घूस मामले में कम की सजा। Image Source : PEXELS (प्रतीकात्मक फोटो)

झारखंड हाईकोर्ट ने 1993 के करप्शन के एक मामले में शख्स की सजा कम की। यह केस शिकायतकर्ता के प्रोविडेंट फंड के पैसे की प्रोसेसिंग के लिए 300 रुपये की घूस मांगने से जुड़ा था। हाईकोर्ट ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि आरोपी 3 दशक तक "मुकदमे की पीड़ा" झेल चुका है। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने Prevention of Corruption Act की धारा 7 के अंतर्गत सजा की अवधि पर विचार करते हुए कहा कि हालांकि इस प्रावधान में कम से कम 6 महीने की सजा का नियम है, लेकिन अपीलकर्ता पहले ही 1 महीने और 1 दिन जेल में कैद रह चुका है। केस की परिस्थितियों के मद्देनजर उसे काफी सजा मिल चुकी है।

PF के पैसों की प्रोसेसिंग के लिए मांगी थी रिश्वत

लाइव लॉ डॉट इन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह केस इस आरोप से जुड़ा था कि अपीलकर्ता ने शिकायतकर्ता से उसके PF के रुपये की प्रोसेसिंग के लिए 300 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। ये घटना साल 1993 की है। बाद में अपीलकर्ता पर केस चलाया गया और उसे Prevention of Corruption Act के तहत दोषी ठहराया गया।

सजा घटाते वक्त इन बातों का रखा गया ध्यान

उसकी याचिका सुनते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने अपराध की परिस्थितियों और कार्यवाही में हुई देरी को देखते हुए सजा के प्रश्न पर अलग से विचार किया। सजा की अवधि के प्रश्न पर हाईकोर्ट ने रिश्वत की मांग में शामिल अपेक्षाकृत छोटी रकम, मुकदमे में लगे लंबे वक्त और अपीलकर्ता के विरुद्ध पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने जैसी बातों को ध्यान में रखा।

यह घटना साल 1993 की है। शिकायतकर्ता पहले ही 3 दशकों तक केस की पीड़ा झेल चुका है। उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। इन सभी हालातों पर एक साथ विचार करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता को अपराध के लिए पर्याप्त सजा मिल चुकी है। इसलिए अदालत ने जेल की सजा घटाकर उतनी ही कर दी, जितनी याचिकाकर्ता पहले ही काट चुका है, यानी 1 महीना और 1 दिन, साथ ही कोर्ट की तरफ से तय किया गया जुर्माना भी चुकाना होगा: झारखंड हाईकोर्ट

जेल में 1 महीना और 1 दिन बिता चुका है याचिकाकर्ता

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता की प्रोविजनल बेल को 5 हजार रुपये जमा करने की शर्त पर मंजूरी मिली थी, जो वह जमा कर चुका है। हाईकोर्ट ने नोटिस किया कि याचिकाकर्ता ने कुल 7 हजार रुपये का भुगतान किया है। इसके अलावा, 1 महीना और 1 दिन जेल में भी बिताया है। इससे पहले, एक मामले में कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ क्रिमिनल केस पेंडिंग होने के चलते सरकारी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटा सकते

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