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आपका बच्चा हर बात पर झिझकता है या अपनी बात कहने से डरता है? इन पेरेंटिंग टिप्स से बढ़ाएं उसका कॉन्फिडेंस

 Written By: Poonam Yadav
 Published : Sep 23, 2026 11:36 pm IST,  Updated : Sep 24, 2026 09:59 am IST

अगर आपका बच्चा छोटी छोटी बात पर झिझकता है या अपनी बात कहने से डरता है तो इन कुछ पेरेंटिंग टिप्स से आप उसका कॉन्फिडेंस बढ़ा सकते हैं

बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ाने के तरीके- India TV Hindi
बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ाने के तरीके Image Source : MAGNIFIC

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा कॉन्फिडेंट बने और बिना किसी संकोच के अपनी बात कहे तो कुछ बातों क ख्याल रखना ज़रूरी होता है। दरअसल, कुछ बच्चों में बहुत ज़्यादा हिचकिचाहट होती है, वे लोगों से कोई भी बात कहने से डरते हैं या सामने वाले से आंखें चुराने लगते हैं। ऐसा व्यवहार सिर्फ माता पिता के साथ ही नहीं बल्कि दोस्तों और टीचर के साथ भी देखने को मिल सकता हैं। ऐसी स्थिति में माता पिता अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित हो जाते हैं। हालांकि, इसमें डरने की ज़रूरत नहीं है, सही पेरेंटिंग को अपनाकर बच्चे के आत्मविश्वास को धीरे-धीरे मजबूत किया जा सकता है।

बच्चे को कॉन्फिडेंट बनाने के लिए इन टिप्स को करें फॉलो

  • खूब करें बातें: अगर आप चाहते हैं कि आपक बच्चा कॉन्फिडेंट बने तो सबसे ज़रूरी है उससे बातें करना। बातचत करने से उसकी हिचकिचाहट कम होगी। आप उससे उसके  स्कूल, दोस्तों के बारे में पूछें। साथ ही उसे भी अपनी बात कहने का मौका दें। जब वह अपनी कोई बात बता रहा हो तो उसे ध्यान से सुनें। इससे बच्चे को लगेगा कि वह जो बात कर रहा है वह ज़रूरी है और उस तरह आपका बच्चा अपनी बात खुलकर कहना सीखेगा।

  • बच्चे के प्रयासों की सराहना करें: अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आत्मविश्वास से भरपूर हो तो उसके हर छोटे बड़े प्रयास की तारीफ करें। बच्चा किसी चीज में हार जाए तो उसे बताए कि जीत से ज़्यादा ज़रूरी उसका उस चीज में पार्टिसिपेट करना है और उसका जश्न मनाएं। किसी भी नतीजे से ज्यादा उसके प्रयास पर ध्यान देने से बच्चे में खुद पर भरोसा बढ़ता है।

  • गलतियों पर डांटने से बचें: अगर आपका बच्चा को छोटी या बड़ी गलती कर रहा है तो उसे डांटने से बचें। हां, उसे समझाएं ज़रूर ताकि गलती करने पर वह आपसे झूट न बोले।

  • उसकी भावनाओं को समझें: अगर आपका बच्चा दुखी, गुस्सा या डरा हुआ हो तो उसकी भावनाओं को नजरअंदाज न करें। उसे यह समझाने की कोशिश करें कि हर भावना सामान्य है और वह आपके साथ खुलकर उसे शेयर कर सकता है। इससे बच्चे को भावनात्मक सुरक्षा और आत्मविश्वास दोनों मिलते हैं. 

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