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जब जीवन में आए बड़ा संकट, तब खुद को कैसे संभालें? बीके शिवानी के ये विचार देंगे आपको हौसला

 Written By: Ritu Raj
 Published : Jul 21, 2026 12:22 pm IST,  Updated : Jul 21, 2026 12:22 pm IST

हर किसी के जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं। लेकिन जब कोई बड़ा संकट आता है तब इंसान पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे में बीके शिवानी की बातें आपको हौसला देने का काम कर सकती है।

बीके शिवानी के ये विचार देंगे आपको हौसला- India TV Hindi
बीके शिवानी के ये विचार देंगे आपको हौसला Image Source : BK SHIVANI/ INSTAGRAM

जब जीवन में कठिन परिस्थितियां, अचानक आया कोई बड़ा संकट या दुःखों का पहाड़ टूट पड़ता है, तो इंसान अंदर से पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे में मन में डर, चिंता और हताशा का छा जाना स्वाभाविक है। ऐसी परिस्थितियां बिन बुलाए मेहमान की तरह आती हैं और पल भर में इंसान के बने-बनाए सपनों, उम्मीदों और योजनाओं को बिखेर कर रख देती हैं। जब कोई मुसीबत आती है तब इंसान को असहायता, डर और अकेलापन उसे चारों तरफ से घेर लेता है। ऐसा महसूस होता है मानो पैरों तले से जमीन खिसक गई हो और अंधकार के सिवाय कुछ नजर न आ रहा हो। ऐसे वक्त में इंसान को मोटिवेशन की जरूरत होती है। बीके शिवानी की कुछ बातें हमे संकट की घड़ी में हौसला देने का काम कर सकती है। यहां हम बीके शिवानी के प्रेरक विचार लेकर आए हैं। 

1. 'क्यों' की जगह 'क्या' और 'कैसे' पर ध्यान दें

जब संकट आता है, तो हमारा मन अक्सर यह सोचने लगता है "यह मेरे साथ ही क्यों हुआ? मैंने ऐसा क्या गलत किया था?" बीके शिवानी कहती हैं कि 'क्यों' पूछने से आपका ध्यान समस्या पर ही अटका रहता है और ऊर्जा नष्ट होती है। इसकी जगह खुद से पूछें "अब स्थिति ऐसी है, तो मुझे आगे क्या करना है और मैं इसे कैसे संभालूं?"

2. मन को शांत रखें
जैसी आपकी सोच होगी, वैसा ही आपका अनुभव होगा। जब बाहर सब कुछ बिखर रहा हो, तो अपने भीतर शांति बनाए रखना ही असली ताकत है। आपने आपस से दोहराएं कि मैं एक शक्तिशाली आत्मा हूं। यह परिस्थिति केवल एक दौर है, जो बीत जाएगा। मेरे पास हर समस्या का समाधान करने की शक्ति है।"

3. स्वीकार करें
जब हम किसी कठिन सच्चाई को स्वीकार करने से इनकार करते हैं, तो दुख कई गुना बढ़ जाता है। अगर कोई मुसीबत आए तो उसे स्वीकार करें। इसका मतलब हार मानना नहीं है, बल्कि वास्तविकता को देखकर सही निर्णय लेना है। बीके शिवानी जी के अनुसार, जब आप स्थिति को 'जैसी है' वैसी ही स्वीकार कर लेते हैं, तब आपका मन शांत होता है और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

4. दूसरों से अपेक्षा छोड़ें, स्वयं के मित्र बनें
कठिन समय में जब लोग साथ छोड़ दें या उम्मीद के मुताबिक मदद न करें, तो उनसे शिकायत करने में अपनी एनर्जी नष्ट न करें। याद रखें, आपका सबसे बड़ा सहारा आप खुद हैं और परमात्मा की शक्ति आपके साथ है। दूसरों से अपेक्षाएं कम करके अपने ऊपर भरोसा रखें। 

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