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Jaun Elia Shayari: सब मेरे बग़ैर मुतमइन हैं...यहां पढ़ें जौन एलिया के दिल छू जाने वाले शेर

 Written By: Ritu Raj
 Published : Jun 10, 2026 11:21 pm IST,  Updated : Jun 10, 2026 11:21 pm IST

Jaun Elia Shayari: ज़िंदगी किस तरह बसर होगी, दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में...जौन एलिया अपनी शायरी के जरिए लोगों का दिल छू जाते थे। उनकी शायरी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। यहां पढ़ें उनकी मशहूर शायरी।

यहां पढ़ें जौन एलिया के दिल छू जाने वाले शेर - India TV Hindi
यहां पढ़ें जौन एलिया के दिल छू जाने वाले शेर Image Source : JAUN ELIA SHAYARI INSTAGRAM

जौन एलिया बीसवीं सदी के सबसे मशहूर, प्रभावशाली और लीक से हटकर लिखने वाले उर्दू शायर थे। उनका असली नाम सैयद जौन असगर था। उन्हें उर्दू शायरी के इतिहास में उनके बेहद अनोखे अंदाज़, बेबाकी, और अकेलेपन व दर्द को पन्नों पर उतारने के लिए जाना जाता है। जौन एलिया का जन्म 14 दिसंबर 1931 को भारत के अमरोहा में हुआ था। वह एक बेहद पढ़े-लिखे और साहित्यिक परिवार से ताल्लुक रखते थे। 1947 में भारत के विभाजन के काफी बाद, यानी 1957 में वह पाकिस्तान चले गए। हालांकि, अमरोहा और भारत की यादें उनके दिल से कभी नहीं गईं, और यह दर्द उनकी शायरी में साफ झलकता है। जौन सिर्फ एक शायर नहीं थे, बल्कि वह अरबी, फारसी, दर्शन और इतिहास के बड़े विद्वान थे। जौन का मुशायरा पढ़ने का अंदाज़ बेहद अलग था। वह अपने बाल बिखेरकर, हाथों को हवा में लहराते हुए और बेहद आक्रामक व नाटकीय अंदाज़ में अपनी बात कहते थे, जिसे लोग खूब पसंद करते थे। उनकी शायरी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। ऐसे में यहां पढ़ें जौन एलिया साहब की मशहूर शारी। 

1.सब मेरे बग़ैर मुतमइन हैं

मैं सब के बग़ैर जी रहा हूं

2. ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में

3. हम कहां और तुम कहां जानां
हैं कई हिज्र दरमियां जानां

4. वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत
अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूं करें हम

5. जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है

6. आज मुझ को बहुत बुरा कह कर
आप ने नाम तो लिया मेरा

7. सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं

8. क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या

9. उस ने गोया मुझी को याद रखा
मैं भी गोया उसी को भूल गया

10. याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं

11. मुस्तक़िल बोलता ही रहता हूं
कितना ख़ामोश हूं मैं अंदर से

12. बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या

13. आईनों को ज़ंग लगा
अब मैं कैसा लगता हूं

14. हुस्न कहता था छेड़ने वाले
छेड़ना ही तो बस नहीं छू भी

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