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आइसक्रीम का इतिहास 2,500 साल पुराना, जानिए पहली आइसक्रीम किस देश में बनी और क्या नाम था

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Jan 01, 2026 03:19 pm IST,  Updated : Jan 01, 2026 03:19 pm IST

History Of Ice Cream: जिस आइसक्रीम को हम और आप बड़े चाव से खाते हैं उसका इतिहास बहुत पुराना है। जानिए किस देश से हुई आइसक्रीम जमाने की शुरुआत और क्या है आइसक्रीम का रोचक इतिहास?

आइसक्रीम का इतिहास- India TV Hindi
आइसक्रीम का इतिहास Image Source : FREEPIK

सर्दी हो या गर्मी लोगों को आइसक्रीम खाना खूब पसंद होता है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में बड़े और बच्चे आइसक्रीम खाने के शौकीन हैं। गर्मी में आइसक्रीम शरीर को ठंडक देती है, मन को खुश कर देती है और मीठे की तलब मिटाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आइसक्रीम की शुरुआत कहां से हुई? सबसे पहले आइसक्रीम किसने बनाई और किस देश में आइसक्रीम का आविष्कार हुआ। जानिए सबसे पहली आइसक्रीम का नाम क्या था?

आइसक्रीम का इतिहास

आइसक्रीम का इतिहास करीब 2,500 साल पुराना है। गर्मियों में तापमान बढ़ते ही ठंडी और मीठी आइसक्रीम की चाह आम है, लेकिन यह शौक कोई नया नहीं है। प्राचीन सभ्यताओं में भी गर्मी से राहत पाने के लिए ठंडे, मीठे व्यंजनों का प्रचलन था। जमी हुई मिठाइयों की शुरुआत को लेकर अलग-अलग दावे मिलते हैं। कहीं 17वीं सदी के इटली और फ्रांस का उल्लेख है तो कहीं पहली सदी के चीन का। हालांकि, आइसक्रीम बनाने से पहले बर्फ के उत्पादन और भंडारण की विश्वसनीय तकनीक जरूरी थी, जो सबसे पहले 550 ईसा पूर्व में फारस जो अब ईरान है वहां विकसित हुई। 

ईरान में विकसित हुई थी बर्फ जमाने की तकनीक

प्राचीन फारसियों ने रेगिस्तानी इलाकों में ‘यखचाल’ नामक बड़े, मधुमक्खी के छत्ते जैसे पत्थर के ढांचे बनाए। इनमें गहरी, इंसुलेटेड अंडरग्राउंड संरचनाएं होती थीं, जिससे साल भर बर्फ को स्टोर किया जाता था। ऊंचे गुंबद गर्म हवा को बाहर निकालते थे, जबकि ‘विंड कैचर’ ठंडी हवा भीतर पहुंचाते थे। ये संरचनाएं न केवल बर्फ का स्टोरेज थीं बल्कि बर्फ बनाने का भी साधन थीं। सर्दियों में नहरों के जरिए उथले तालाबों में पानी भरा जाता था, जो रात के कम तापमान और शुष्क हवा के कारण जम जाता था। ईरान में आज भी कई यखचाल मौजूद हैं। 

सबसे पहले शोरबे और फलूदा जैसी आइसक्रीम बनीं

इस स्टोर की गई बर्फ से फलों के शरबत, शोरबे और ‘फलूदा’ जैसे व्यंजन बनाए जाते थे। लगभग 650 ईस्वी में फारस पर अरब विजय के बाद यह तकनीक मध्य पूर्व में फैल गई। इसी तकनीक से सीरिया में ‘बूज़ा’ और फारस में ‘बस्तानी’ जैसी खिंचावदार आइसक्रीम तैयार की गई। इसी काल में चीन के तांग राजवंश के दौरान ‘सुशन’ नामक जमी हुई मिठाई बनाई गई, जिसे कवियों ने मुंह में पिघलने वाली, तरल और ठोस के बीच की बनावट वाला बताया। जमाने के साथ फ्रीजिंग की तकनीक में बदलाव आया। 1558 में नेपल्स में जियाम्बातिस्ता डेला पोर्ता की पुस्तक ‘माजिया नातुरालिस’ प्रकाशित हुई, जिसमें बर्फ में शोरा (पोटैशियम नाइट्रेट) मिलाकर तरल पदार्थों को तेजी से ठंडा करने की विधि बताई गई। 

इटली और फ्रांस में चीनी से बनी आइसक्रीम जमाने लगे

17वीं सदी में नमक, पानी और बर्फ के मिश्रण से भी इसी तरह का प्रभाव सामने आया, जिससे कम बर्फ में ही जमी हुई मिठाइयां बनाना संभव हो गया। इस तकनीक को कैरेबियाई यूरोपीय बागानों से मिलने वाली सस्ती चीनी की आपूर्ति से बल मिला। चीनी जमी हुई मिठाइयों में अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि यह मिश्रण को ठोस बर्फ के ढेले बनने से रोकती है। आधुनिक आइसक्रीम की ‘पहली’ रेसिपी को लेकर 1690 के दशक में इटली और फ्रांस के बीच दावे सामने आए।

दूध, चीनी और फलों से मिलकर बनती थी आइसक्रीम

 इटली में कार्डिनल बारबेरिनी के लिए काम करने वाले अल्बर्टो लातिनी ने 1694 में ‘द मॉडर्न स्टूअर्ड’ किताब में दूध, चीनी और फलों से बने ‘मिल्क सोरबे’ की रेसिपी दी, जिसे आज के जेलाटो का पूर्वज माना जाता है। वहीं फ्रांस में लुई 14वें के मंत्री जीन-बैप्टिस्ट कोलबेर्ट के लिए काम कर चुके निकोलस ओदिजे ने 1692 में ‘ला मेज़ों रेग्ले’ में फलों के सोरबे और संतरे के फूलों के जल से स्वादिष्ट आइसक्रीम की रेसिपी छपी। विशेषज्ञों के अनुसार, ओदिजे की रेसिपी में मिश्रण को लगातार चलाने और खुरचने की तकनीक बताई गई, जिससे बनावट बेहतर हुई। इस तरह सदियों की तकनीकी और पाक कला की प्रगति के बाद आज की क्रीमी आइसक्रीम अस्तित्व में आई। 

 

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