आजकल के बिजी लाइफस्टाइल में लोग मासनिक बीमारियों का तेजी से शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह है, बढ़ता स्ट्रेस और अवसाद! ऐसे में मेंटल हेल्थ को बनाए रखने और डिप्रेशन से बचाने में मेडिटेशन बेहद फायदेमंद है। यह न केवल स्ट्रेस को दूर करता है बल्कि दिमाग को शांति और सुकून भी प्रदान करता है। मेडिटेशन एक ऐसी प्रैक्टिस है, जिससे दिमाग एकदम रिलैक्स हो जाता है।आप ज्यादा खुश रहते हैं, कुछ ही देर में टेंशन फ्री हो जाते हैं। छोटी या बड़ी हर चीज़ों पर अच्छी तरह से ध्यान लगा पाते हैं और सबसे जरूरी इससे नींद भी अच्छी आती है और आप खुद को उम्र से कम महसूस करते है। ऐसे में चलिए ओशो के करीबी और प्रसिद्ध ध्यान शिक्षक, स्वामी आनंद अरुण से जानते हैं स्वस्थ दिमाग के लिए मेडिटेशन ज़रूरी क्यों है साथ ही स्ट्रेस और अवसाद से छुटकारा दिलाने में कौन से ध्यान आएंगे काम?
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ध्यान और योग से दूर होगा अवसाद
मेंटल प्रॉब्लम आजकल पैंडेमिक की तरह फैली है। स्वामी आनंद अरुण कहते हैं कि लोग ध्यान में तब लगते है जब शरीर में दूध, दर्द और पीड़ा होती है। जबकि, ध्यान और योग को हमें अपने जीवन में हमेशा शामिल करना चाहिए। इसे करने से आप अवसाद से बाहर निकल कर एक बेहतर जीवन की शुरुआत कर सकते हैं।
मानसिक सुकून के लिए करें ये मेडिटेशन:
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नादब्रह्म: नादब्रह्म यानि आवाज से जुड़ा (Related to Sound) एक योग है। जो शरीर और आत्मा के बीच आपसी तालमेल बनाने का काम करता है। माना जाता है कि नादब्रह्म से प्रकृति के परम तत्वों तक पहुंचाने में आपकी मदद करता है।
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विपासन : विपासन एक मानसिक व्यायाम है जो तन और दोनों का उपचार करता है। ये खुद को जानने, दुख से उबरने और मन की शांति के लिए काम करता है। लंबे समय तक अभ्यास करने से दिमाग डिटॉक्स हो जाता है, विचारों और अवसाद पर रोक लगता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और आप तन और मन से मजबूत होते हैं।
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चक्र साउंड मेडिटेशन: यह ध्यान चक्रों या शरीर के ऊर्जा-केंद्रों को खोलने और साथ में उनके प्रति सजगता लाने के लिए, मुखर ध्वनियों का उपयोग करता है। मौखिक ध्वनियां करके, या केवल संगीत को सुनते हुए और उसकी ध्वनियों को भीतर महसूस करके, यह ध्यान आपको गहरे शांत अंतर-मौन में ले जाता है।
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कुंडलिनी योग: कुंडलिनी योग करना सेहत के लिए कई तरीकों से फायदेमंद होता है। इसे करने से मेमोरी पावर बढ़ने के साथ ही साथ शरीर में उर्जा की कमी नहीं होती है। यह शरीर में रक्त संचार बढ़ाने के साथ ही साथ तनाव, एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षणों को भी कम करने में काफी मददगार साबित होता है।
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डायनामिक ध्यान: यह ध्यान शरीर और मन के भीतर पुराने गहरे खुदे हुए घाव को तोड़ने के लिए है। इस ध्यान को आप अकेले कर सकते हैं, लेकिन शुरुआत में इसे ग्रुप में करना मददगार हो सकता है।