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जीवन में कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा करते हैं वीर सावरकर के ये अनमोल विचार, आज ही बांध लें गांठ

 Written By: Ritu Raj
 Published : Jun 01, 2026 01:30 pm IST,  Updated : Jun 01, 2026 01:30 pm IST

Veer Savarkar Quotes: वीर सावरकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रखर राष्ट्रवादी नेता, विचारक, लेखक और कवि थे। उन्होंने भारतीय राजनीतिक क्षितिज पर 'हिंदुत्व' की विचारधारा को विकसित करने में मुख्य भूमिका निभाई। उनके विचार लोगों को मोटिवेट करने का काम करते हैं। ऐसे में यहां पढ़ें वीर सावरकर के प्रेरक, अनमोल विचार।

Veer Savarkar Quotes- India TV Hindi
Veer Savarkar Quotes Image Source : PTI

विनायक दामोदर सावरकर, जिन्हें वीर सावरकर के नाम से जाना जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, समाज सुधारक और लेखक थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन में एक प्रभावशाली भूमिका निभाई। सावरकर बचपन से ही राष्ट्रवाद के प्रति समर्पित थे। उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर 'अभिनव भारत सोसाइटी' नामक एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की थी। सावरकर ने "The Indian War of Independence - 1857" नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी। इस पुस्तक में उन्होंने अंग्रेजों द्वारा "सिपाही विद्रोह" कहे जाने वाले 1857 के आंदोलन को "भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम" सिद्ध किया। इस पुस्तक पर अंग्रेजों ने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था। 1910 में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्हें दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाकर अंडमान की सेलुलर जेल भेज दिया गया। वहां उन्होंने जेल की दीवारों पर कंकड़ों और कोयले से कविताएं और इतिहास लिखा। वहां बिताए गए कठिन वर्षों के दौरान उनके साहस के कारण ही उनके नाम के आगे 'वीर' शब्द जुड़ा। उनके विचार आज भी लोगों में कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा करते हैं। ऐसे में यहां पढ़ें उनके प्रेरक, अनमोल विचार हिंदी में। 

Veer Savarkar Motivational Quotes in Hindi 

  • महान लक्ष्य के लिए किया गया कोई भी बलिदान व्यर्थ नहीं जाता है।
  • अपने देश की, राष्ट्र की, समाज की स्वतंत्रता- हेतु प्रभु से की गई मूक प्रार्थना भी सबसे बड़ी अहिंसा का द्योतक है।
  • कष्ट ही तो वह चाक शक्ति है जो इंसान को कसौटी पर परखती है और उसे आगे बढ़ाती है।
  • दूसरो का समान करने की शक्ति रखने वालों में ही मैत्री संभव है।
  • प्रतिशोध की भट्टी को तपाने के लिए विरोधों और अन्याय का ईंधन अपेक्षित है, तभी तो उसमें से सद्गुणों के कण चमकने लगेगें। इसका मुख्य कारण है कि प्रत्येक वस्तु अपने विरोधी तत्व से रगड खाकर ही स्फुलित हो उठती है।
  • मनुष्य की सम्पूर्ण शक्ति का मूल उसके खुद की अनुभूति में ही विद्यमान है।
  • मन, सृष्टि के विधाता द्वारा मानव-जाति को प्रदान किया गया एक ऐसा उपहार है, जो मनुष्य के परिवर्तनशील जीवन की स्थितियों के अनुसार स्वयं अपना रूप और आकार भी बदल लेता है।
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