वजन घटाने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग फिटनेस लोगों का पसंदीदा तरीका बनता जा रहा है। हालांकि भारत में प्राचीन काल से ही उपवास को स्वस्थ रहने के लिए अहम बताया गया है। लेकिन पिछले कुछ सालों में कई मशहूर हस्तियों, फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और वजन कंट्रोल करने वाले लोगों ने इसे लेकर नया क्रेज पैदा कर दिया है। इंटरमिटेंट फास्टिंग से आपका कैलोरी इनटेक सीमित समय के लिए हो जाता है जिससे वजन पर काफी जल्दी असर होता है। लेकिन क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए सही है। क्या आप इसे बिना सोचे समझे खुद से ही फॉलो कर सकते हैं। क्योंकि कोई भी फेमस चीज को बिना जांचे परखे तुरंत अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदे की जगह नुकसान भी कर सकता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में 16:8 नियम, जिसमें 16 घंटे उपवास किया जाता है और आठ घंटे आपको खाना खाना होता है। एक तरीका है 12:12, जिसमें बराबर समय होता है यानि 12 घंटे फास्टिंग और 12 घंटे खाना खाना होता है। इसके अलावा कुछ लोग समय सीमा को हटाकर कितनी बार खाना खाया इस पर ध्यान देते हैं। जैसे एक्ट्रेस कैटरीना कैफ दिन में सिर्फ 2 बार खाना खाती हैं। लेकिन असली सवाल है कि क्या हर कोई सुरक्षित रूप से इंटरमिटेंट फास्टिंग कर सकता है।
कोई भी कर सकता है इंटरमिटेंट फास्टिंग?
डाइटिशियन स्वाति सिंह की मानें तो इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए सही नहीं है। उन्होंने बताया कि इसके कुछ फायदे हैं जैसे कि मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार और पाचन तंत्र को लगातार खाना पचाने से आराम मिलना। हालांकि सावधानियां बरतना जरूरी है और इंटरमिटेंट फास्टिंग को अंधाधुंध नहीं अपनाना चाहिए।
किसे नहीं करनी चाहिए इंटरमिटेंट फास्टिंग?
जिन लोगों को ब्लड शुगर की समस्याएं हैं उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए। टाइप 2 डायबिटीज, नियमित रूप से हाई ब्लड शुगर और हाई HbA1c वाले लोगों को इंटरमिटेंट फास्टिंग केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करनी चाहिए। टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों के लिए भी इसकी सलाह नहीं दी जाती है। ऐसे लोगों को भी फास्टिंग से बचना चाहिए जिन्हें पोषण की लगातार जरूरत होती है। साथ ही उन लोगों को भी फास्टिंग नहीं करनी चाहिए जो किसी न किसी अंग की कोई बीमारी से पीड़ित हैं। अगर आप गर्भवती महिला हैं या बच्चे को दूध पिलाती हैं तो ऐसी मांओं को भी इंटरमिटेंट फास्टिंग से बचना चाहिए। बच्चों और युवाओं को भी इससे बचने की सलाह दी जाती है, जिन्हें हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए पर्याप्त पोषक तत्वों की जरूरत होती है। किडनी की बीमारियों या दिल संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए।
इंटरमिटेंट फास्टिंग के नुकसान
इससे आपको कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। डाइटिशियन ने बताया कि लंबे समय तक फास्टिंग से सिरदर्द हो सकता है। दो खाने के बीच लंबा गैप करने से थकान और चक्कर आने की समस्या हो सकती है। इससे पेट संबंधी समस्याएं जैसे सूजन और दस्त हो सकते हैं। जब आप एक बार में ही बहुत ज्यादा फाइबर लेते हैं तो इससे असंतुलित पोषण की समस्या हो सकती है। पानी और फाइबर कम होने से कब्ज बढ़ सकती है।