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लाख कोशिश के बाद भी मनुष्य नहीं जीत सकता किस्मत से, जो लिखा है उसे बदलना नामुमकिन

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Jul 04, 2021 06:04 am IST,  Updated : Jul 04, 2021 06:04 am IST

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

Chanakya Niti-चाणक्य नीति- India TV Hindi
Chanakya Niti-चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भरे ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार होनी पर आधारित है। यानी कि जो होना किस्मत में लिखा है वो हो के रहेगा।

'होनी को नहीं टाला जा सकता है। होनी होकर ही रहती है। होनी के वक्त वैसा ही अनुकूल वातावरण बन जाता है, हमारी बुद्धि भी उसके अनुसार ही कार्य करने लगती है।' आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के इस कथन का अर्थ है कि जिंदगी में जो लिखा है वो हो के रहेगा। आप लाख कोशिश क्यों ना कर लें उसे बदलने की या फिर रोकने की लेकिन जो किस्मत में लिखा जा चुका है उसका होना अटल है। 

किसी भी परिस्थिति में मनुष्य को नहीं करना चाहिए अशुभ कार्य, बन जाएगा पाप का भोगी

असल जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि मनुष्य चाह के भी उन चीजों को होने से रोक नहीं पाता जिन्हें वो होता हुआ देखना नहीं चाहता। ये चीजें किसी अपने के दूर होने से संबंधित हो सकती हैं, किसी से अपना रिश्ता टूटना या फिर लाख कोशिश के बावजूद आपका किसी से मन मुटाव होना। हालांकि इन मन मुटाव को रोकना इन सभी चीजों में ऐसा है जिसे आप चाहे तो रोक सकते हैं। लेकिन ऐसा करने में भी आप असफल हो सकते हैं। इसके पीछे की वजह आपकी बुद्धि का उसी तरह से सोचना और आपका उसी के अनुसार रिएक्ट करना है। 

Chanakya Niti: ऐसी परिस्थिति में मनुष्य जीतने वाले से भी सौ गुना ज्यादा है बेहतर

अब बात करते हैं रिश्तों की। कई बार आप चाहते हैं कि सामने वाले से आपका रिश्ता हमेशा बना रहे। लेकिन अगर ऐसा होना आपकी किस्मत में नहीं लिखा है तो उसे टाला नहीं जा सकता। हो सकता है कि आप उस वक्त अपने रिश्ते को बचाने की लाख कोशिश कर लें। अपने में बदलाव भी ले आएं लेकिन सामने वाला भी ऐसा ही करें ये संभव नहीं है। हो सकता है कि वो भी अपने रिश्ते को बचाने के लिए खुद में कुछ बदलाव करें। लेकिन उसके ये सारे प्रयास एक समय बाद निर्थक ही साबित होंगे। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि होनी को नहीं टाला जा सकता है। होनी होकर ही रहती है। होनी के वक्त वैसा ही अनुकूल वातावरण बन जाता है, हमारी बुद्धि भी उसके अनुसार ही कार्य करने लगती है।

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