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नवंबर व्रत-त्योहार कैलेंडर: इस माह पड़ रहे हैं धनतेरस, दिवाली, देवउठनी एकादशी समेत ये पर्व

नवंबर का माह कार्तिक मास के साथ शुरू हो चुका है। इसके साथ ही कई व्रत त्योहार शुरू हो चुके है। इस माह करवा चौथ के साथ दिवाली, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा पड़ रही है। जानिए इस माह पड़ने वाले बड़े व्रत त्योहारों के बारे में।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: November 07, 2020 7:53 IST
हिंदू कैलेंडर के अनुसार नंवबर माह में करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली समेत पड़ रहे हैं ये व्रत त्‍योहार	- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM/GIFT_ANGLE1/ हिंदू कैलेंडर के अनुसार नंवबर माह में करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली समेत पड़ रहे हैं ये व्रत त्‍योहार

नवंबर का माह कार्तिक मास के साथ शुरू हो चुका है। इसके साथ ही कई व्रत त्योहार शुरू हो चुके है। इस माह करवा चौथ के साथ दिवाली, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा पड़ रही है। जानिए इस माह पड़ने वाले बड़े व्रत त्योहारों के बारे में। 

नवंबर 2020 में पड़ने वाले व्रत त्योहार

4 नवंबर ,  बुधवार- करवा चौथ

इन दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु औैर स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखती है।  

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8 नवबंर - रविवार - भानु सप्तमी, कालाष्टमी, अहोई अष्टमी, राधा कुण्ड स्नान  
इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती है। इ व्रत में शाम को तारे दिखने के बाद अहोई की पूजा करते व्रत तोड़ती है। 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार सप्तमी तिथि के दिन यदि रविवार का दिन पड़ता है तो उस दिन को भानु सप्तमी कहते हैं। इस दिन के बारे में ऐसी मान्यता है कि इसी दिन यानि, भानु सप्तमी के दिन सूर्य देवता पहली बार सात घोड़े के रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे।

कालाष्टमी के दिन भगवान शिव के विग्रह रूप काल भैरव की पूजा का विधान बताया गया है।  कालाष्टमी का व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अष्टमी को अहोई अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस साल यह अष्टमी 8 नवंबर 2020, यानी रविवार को मनाई जा रही है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए अहोई माता का व्रत और पूजा करती हैं।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन राधा कुंड में जो कोई भी निसंतान दंपत्ति अहोई अष्टमी के दिन स्नान करता है उसे संतान की प्राप्ति अवश्य होती है।

11 नवंबर - बुधवार - रमा एकादशी
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को  रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।  

12 नवंबर 2020-गुरुवार - गोवत्स्व द्वादशी

कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली द्वादशी को गोवत्स द्वादशी के नाम से जाना जाता है। देश में कई जगहों पर इसे बछ बारस का पर्व भी कहते हैं। गुजरात में इस दिन को वाघ बरस के नाम से जाना जाता है।

13 नवंबर - शुक्रवार- धनतेरस,  यम दीप, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, काली चौदस, हनुमान पूजा
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को घनतेरस पड़ता है। इस दिन सोना-चांदी के अन्य चीजें खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन दिवाली पूजन के समय लगने वाली गणपति और माता लक्ष्मी की मूर्ति भी लाई जाती है।

मां दुर्गा का एक रूप है मां काली और मां काली से जुड़े कई त्यौहार हिंदू धर्म में मनाए जाते हैं। इनमें से काली चौदस नाम का त्यौहार सबसे ज्यादा प्रचलित है। काला रंग बुराई का नाशक माना गया है और चौदस का मतलब होता है चौदह।

मासिक शिवरात्रि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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14 नवंबर - शनिवार - दिवाली, नरक चतुर्दशी

नरक चतुर्दशी, तमिल दीवाली, दीवाली, लक्ष्मी पूजा, दीप-मलिका, केदारगौरी व्रत, चोपड़ा पूजा, शारदा पूजा, काली पूजा, कमला जयंती, दर्श अमावस्या, अन्वाधान, बाल दिवस, चाचा नेहरु जयंती 

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तो दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। इस बार इसी दिन नरक चर्तुदशी भी पड़ रहा है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। 

हिंदू धर्म में तो कई व्रत-त्यौहार मनाए जाते हैं लेकिन उनमें से दीपावली का त्यौहार सबसे ज्यादा प्रमुख होता है। दीवाली का त्यौहार प्रभु श्री राम की 14 साल के वन-वास के बाद अयोध्या वापसी के उपलक्ष्य  में मनाया जाता है।

नरक चतुर्दशी, दीवाली से एक दिन पहले छोटी दीवाली को मनाए जाने का विधान है। ऐसे में इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। इसके पीछे का तर्क यह दिया जाता है कि बजरंगबली हनुमान जी के जन्म तिथि के बारे में कोई सुनिश्चित तिथि का उल्लेख कहीं नहीं है।

हिंदू शास्त्रों में दर्श अमावस्या का दिन बेहद ही शुभ माना जाता है। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन दर्श अमावस्या आती है। इस रात में चंद्रमा के दर्शन नहीं होते हैं।

दुनिया भर में बाल दिवस अलग अलग तिथीयोंको मनाया जाता है। भारत में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन, 14 नवंबर, को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

15 नवंबर - रविवार - गोवर्धन पूजा
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है। 

16 नवंबर - सोमवार - भाई दूज
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई-बहन का त्योहार भाई दूज मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। 

20 नवंबर - शुक्रवार - छठ पूजा
कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को छठ पूजा का त्योहार मनाया जाता है। जिसकी शुरूआत नहाय खाय से होती है जोकि 18 नवंबर को मनाया जाएगा। विशेष तौर पर छठ पूजा बिहार में बेहद ही धूमधाम से मनाई जाती है। बिहार में इस पर्व को लेकर एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। छठ पूजा में मुख्य रूप से भगवान सूर्य की पूजा का विधान बताया गया है।

23 नवंबर- सोमवार- अक्षय नवमी
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी या आंवला नवमी कहते हैं। पौराणिक मान्याओं के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी आवंले के पेड़ पर निवास करते हैं।

25 नवंबर-बुधवार- देव उठनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थानी एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।  देव-उठनी एकादशी को देश के कई हिस्सों में हरि प्रबोधिनी एकादशी तो कहीं देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन के बारे में ऐसी मान्यता है कि जब आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो जाते हैं उसके बाद इस दिन यानी कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन वह वापस जागते हैं। 

26 नवंबर 2020-बृहस्पतिवार 

वैष्णव देवुत्थान एकादशी, योगेश्वर द्वादशी, तुलसी विवाह, वैष्णव गुरुवायुर एकादशी 

हिंदू धर्म के अनुसार देव-उठनी एकादशी यानी कि जिस दिन भगवान विष्णु अपनी निद्रा से जागते हैं उस दिन तुलसी विवाह का भी प्रावधान बताया गया है। इसी दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी के पौधे का विवाह कराए जाने की भी मान्यता है।

 

30 नवंबर-सोमवार- कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली का भी त्योहार मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा में दीपदान का विशेष महत्व होता है

गुरु नानक देव सिख समुदाय के पहले गुरु थे। ऐसे में इनकी जयंती को गुरु नानक जयंती या गुरु पर्व के रूप में हर साल मनाए जाने की परंपरा है।

रोहिणी व्रत, जैन समुदाय के लिए रोहिणी व्रत का बेहद महत्व बताया गया है।  रोहिणी व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन का व्रत घर और जीवन में सुख शांति की कामना के लिए भी रखा जाता है।

इनपुट अनिल कुमार ठक्कर

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