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पाकिस्‍तान ने शदाणी दरबार की यात्रा के लिए भारतीय हिंदू श्रद्धालुओं को वीजा किया जारी, जानें इस तीर्थ के बारे में

 Written By: Sushma Kumari @ISushmaPandey
 Published : Nov 22, 2022 07:12 pm IST,  Updated : Nov 22, 2022 07:56 pm IST

पाकिस्तानी उच्चायोग ने दिसंबर 2022 में भारत के हिंदू श्रद्धालुओं को पाकिस्‍तान के धार्मिक स्थलों की यात्रा करने के लिए 100 वीजा जारी किया है।

शदाणी दरबार- India TV Hindi
शदाणी दरबार Image Source : PTI

पाकिस्‍तानी उच्‍चायोग (Pakistan High Commission) ने भारत के हिंदू श्रद्धालुओं को पाकिस्‍तान के धार्मिक स्‍थलों की यात्रा के लिए 100 वीजा जारी किया है। पाकिस्‍तानी उच्‍चायोग ने बताया कि सिंध प्रांत के सुक्‍कूर (Sukkur) में शिव अवतारी सतगुरु संत शादाराम साहिब की 314वीं जयंती में शिरकत करने के लिए यह कदम उठाया है। संत शादाराम साहिब की जयंती 22 नवंबर से 3 दिसंबर तक पाकिस्तान में होने वाली है। 

नई दिल्‍ली स्थित पाकिस्‍तानी उच्‍चायोग ने बताया कि 22 नवंबर से 3 दिसंबर तक सिंध प्रांत के सुक्‍कूर में शिव अवतारी सतगुरु संत शादाराम साहिब की 314वीं जयंती समारोह में भाग लेने के लिए पाकिस्तान जाने वाले भारतीय हिंदू तीर्थयात्रियों का एक समूह को 100 वीजा जारी किए। बता दें कि भारत-पाकिस्तान प्रोटोकॉल के अनुसार, हर साल भारत से हजारों सिख और हिंदू तीर्थयात्री धार्मिक त्योहारों और कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए पाकिस्तान जाते हैं।

क्या है शदाणी दरबार?

शादाणी दरबार (Shadani Darbar) मंदिर की स्‍थापना 300 साल पहले की गई थी और दुनिया भर के हिंदू भक्तों के लिए यह एक पवित्र स्थान माना जाता है। शादानी दरबार की स्थापना 1786 में लाहौर में पैदा हुए संत शादाराम साहिब द्वारा की गई थी। मंदिर की वेबसाइट के अनुसार, संत शादाराम का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में लोहाना खत्री परिवार में हुआ था। उन्हें भगवान राम के पुत्र लव का वंशज और भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है।

1974 भारत-पाकिस्तान प्रोटोकॉल

साल 1974 के धार्मिक स्थलों की यात्रा पर पाकिस्तान-भारत प्रोटोकॉल के अनुसार, दोनों देशों के हिंदू और सिख तीर्थयात्रियों को सामान्य आव्रजन प्रक्रिया से गुजरे बिना कुछ धार्मिक स्थलों पर जाने के लिए वीजा मिलता है। भारत के हजारों सिख और हिंदू तीर्थयात्री हर साल अलग-अलग धार्मिक त्योहारों और अवसरों में भाग लेने के लिए पाकिस्तान जाते हैं। तीर्थयात्री केवल समूहों में ही यात्रा कर सकते हैं और ऐसे समूहों की संख्या प्रत्येक वर्ष निर्धारित की जाती है। 

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