राजगढ़: मध्यप्रदेश के राजगढ़ में एक ऐसा मंदिर है, जहां पुलिसकर्मियों को अपनी पोस्टिंग से पहले आमद देने की मान्यता है। इस मंदिर को पुलिसवाली माता का मंदिर भी कहा जाता है। आजादी के एक साल पहले यहां थाने का निर्माण हुआ था। ऐसे में मान्यता है कि यहां दीवार के अंदर से प्रकट होकर माता चामुंडेश्वरी ने दर्शन दिए थे। इसके बाद से आज तक माता के दर्शन दीवार में ही किए जाते हैं।
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कहां है ये मंदिर?
ये मंदिर राजगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 56 किलोमीटर दूर सुठालिया तहसील के मऊ गांव में स्थित है। यहां मंदिर के अंदर ही आजादी से एक साल पहले बनीं मऊ थाने की बिल्डिंग भी स्थित है। जिसका निर्माण साल 1946 में कराया गया था। उसी समय थाने के पास ही जब माता का मंदिर बनाने और प्रतिमा लाने की योजना बनाई गई तो माता ने स्वयं दीवार से प्रकट होकर दर्शन दिए थे, ऐसी मान्यता है। तब से लेकर आज तक मंदिर में पुलिस के द्वारा ही पूजा अर्चना की जाती है।
यहां मंदिर में होने वाले माता के श्रृंगार, आयोजन, अनुष्ठान और भंडारे का खर्च भी पुलिस के द्वारा ही उठाया जाता है। मंदिर के चमत्कार का वर्णन थाने के रोजनामचे और बीसीएल में आज भी अंकित है। थाने का स्थान बदला लेकिन नाम नहीं बदला।
मंदिर के पुजारी ने क्या बताया?
मंदिर के पुजारी राधेश्याम दुबे ने बताया कि मऊ माता का मंदिर स्टेट समय का मंदिर है। तब मऊ गांव नरसिंहगढ़ स्टेट के अंदर आता था। उस समय यहां राजा महाराजाओं की गड़ी थी। साल 1946 में जब मऊ थाना बना तो उसी समय मंदिर बनाने की योजना बनाई तो माता ने दीवार के अंदर प्रकट होकर दर्शन दिए थे। इसके बाद एक जलते दीपक ने मंदिर के चक्कर लगाकर चमत्कार दिखाया था।
पुजारी ने बताया कि यहां से माता की बिना इच्छा के दो बार थाने को शिप्ट किया गया था। तब अचानक बिल्डिंग गिर गई थी। उसी समय कलेक्टर और एसपी के बंगले पर भी पत्थरों की वर्षा हुई तो रात में ही थाने को वापस मऊ में ही शिप्ट किया गया। इसके बाद माता की इच्छा से मऊ से 5 किलोमीटर दूर सुठालिया में थाना शिप्ट किया गया तो उसका नाम आज भी मऊ सुठालिया के नाम से ही रखा गया।
कलेक्टर के भी कांपने लगे थे हाथ
मंदिर के पुजारी ने बताया कि जब यहां से बिल्डिंग खाली हुई तो कलेक्टर के द्वारा यहां स्कूल लगाने का फरमान जारी कर दिया था। उसी समय गांव के सरपंच रहे निर्भय सिंह यादव ने कलेक्टर से लिखित में आदेश मांगा तो कलेक्टर के भी हाथ कांपने लगे और कलम दूर जाकर गिर गई थी। तब कलेक्टर ने इसे यथावत रखने का आदेश दिया था।
मान्यता है कि माता रुकवा देती हैं ट्रांसफर
मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस सुठालिया थाने में जो भी थाना प्रभारी आता है, वो माता की इच्छा से ही टिक पाता है। पूर्व में रहे थाना प्रभारी के द्वारा बीसीएम में इसका उल्लेख भी किया गया है। आज भी जो नया थाना प्रभारी आता है, वो पहले मंदिर में आमद देता है, उसके बाद ही अपनी कुर्सी संभालता है।
मान्यता है कि इस मंदिर पर जो ध्यान नहीं देता है वो सीधा सस्पेंड होकर यहां से जाता है। वहीं जो माता से मन्नत करता है, उसका ट्रांसफर भी तुरंत रुक जाता है।
सुठालिया थाना प्रभारी ने मंदिर को लेकर कही ये बात
सुठालिया थाना प्रभारी प्रवीण जाट ने बताया कि साल 1946 से लेकर 1988 तक थाना मऊ के अंदर ही था। उसके बाद सुठालिया में नए थाने का निर्माण किया गया था। इस मंदिर को लेकर विशेष मान्यता है। इस मंदिर पर पुलिसवालों की विशेष आस्था है। यहां जिसकी भी पहले पोस्टिंग होती है, वो पहले माता के मंदिर में पहुंचकर आमद देता है। उसके बाद उसकी रोजनामचे में आमद होती है। पीएचक्यू की आईडी में भी मऊ सुठालिया का नाम दर्ज है। नवरात्रि के नौवें दिन यहां पर पुलिस के द्वारा ही भंडारे का आयोजन किया जाता है। जिसमें एसपी सहित जिलेभर के पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं। (इनपुट: गोविंद सोनी)