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गुना में दो सरपंचों ने पंचायत को ही रख दिया गिरवी! स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट साइन भी हुआ, जानें पूरा मामला

 Published : May 24, 2025 04:18 pm IST,  Updated : May 24, 2025 04:53 pm IST

गुना जिले के दो सरपंचों ने अपनी-अपनी पंचायत को गिरवी रख दी। सूचना मिलने पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दोनो सरपंचों को बर्खास्त कर दिया है।

करोद पंचायत- India TV Hindi
करोद पंचायत Image Source : INDIA TV

गुनाः मध्य प्रदेश के गुना जिले की एक पंचायत को 20 लाख रुपये में गिरवी रख दिया गया। पंचायत को गिरवी रखने के लिए महिला सरपंच और पंच के बीच में एग्रीमेंट भी साइन किया गया। हैरान कर देने वाले इस मामले की खबर जब जिला प्रशासन को मिली तो आनन-फानन में सरपंच और पंच दोनों को बेदखल कर दिया गया। पंचायत अधिनियम की धारा-40 के तहत महिला सरपंच और पंच दोनों को बर्खास्त कर दिया गया। 

 

20 लाख रुपये में गिरवी रख दी पंचायत

जानकारी के अनुसार, महिला आरक्षित सीट ग्राम पंचायत करोद में चुनाव के बाद से ही दबंगों ने अपना कब्जा जमा लिया था। सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए लक्ष्मी बाई पत्नी शंकर सिंह गौड़ ने गांव के ही हेमराज सिंह धाकड़ से 20 लाख रुपए उधार लिए थे। पैसों की गारंटी पंच रणवीर सिंह कुशवाह ने ली थी। एग्रीमेंट में लिखा गया था कि चुनाव जीतने के बाद पंचायत में जो भी विकास कार्य किए जाएंगे उसका 5% कमीशन सरपंच लक्ष्मी बाई को दिया जाएगा।

विकास कार्य कराने के लिए पंच रणवीर सिंह कुशवाह को सरपंच प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया जाता है। 20 लाख रुपए के चेक हेमराज सिंह धाकड़ के पास बतौर गारंटी के रूप में रखे गए हैं। पंचायत में जो भी सरकारी पैसे से काम किए जाएंगे। उसी के पैसों से हेमराज सिंह धाकड़ का लोन चुकाया जाएगा। 

सरपंच की चेक बुक, पंचायत की सील समेत अन्य दस्तावेज साहूकार के पास गिरवी रखी

100 रुपए के स्टांप पर एग्रीमेंट करते हुए सरपंच लक्ष्मीबाई, उसके पति शंकर सिंह और पंच रणवीर सिंह कुशवाह समेत रविन्द्र सिंह ने हस्ताक्षर किए। ये एग्रीमेंट 28/11/2022 में किया गया था। 20 लाख रुपए का लोन लेने के बाद तीसरे व्यक्ति को पंचायत गिरवी रख दी गई। महिला सरपंच की चेक बुक, पंचायत की सील समेत अन्य दस्तावेज भी लोन देने वाले साहूकार हेमराज सिंह कुशवाह के पास गिरवी रख दिए गए। 

लक्ष्मीबाई ने दी ये सफाई

वहीं, किराए के मकान में रहने वाली करोड की बर्खास्त सरपंच लक्ष्मीबाई का कहना है कि उन्हें पढ़ना लिखना नहीं आता है। सरपंच बनने के बाद ही उन्होंने अपना केवल नाम लिखना सीखा है। उससे पहले वह अंगूठा लगाती थी। इसके चलते उनके बिना जानकारी में यदि कहीं दस्तखत करा लिए लिए गए हों तो उन्हें पता नहीं है।

चाचौड़ा की रामनगर पंचायत को भी रख दी गिरवी

ऐसा ही एक और मामला भी प्रशासन के संज्ञान में आया है। चाचौड़ा की रामनगर पंचायत में आदिवासी महिला सरपंच मुन्नीबाई सहरिया ने गांव के दबंग रामसेवक मीना से पैसे उधर लेकर चुनाव लड़ा था। चुनाव जीतने के बाद दोनों के बीच एग्रीमेंट हुआ कि पंचायत पर रामसेवक मीना का हक होगा जिसके बदले वो एक लाख रुपए सालाना सरपंच मुन्नीबाई को अदा करेगा। 

दोनों महिला सरपंच पद से हटाई गई

कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बताया कि ये दोनों मामला बेहद गंभीर है। जांच के बाद दोनों महिला सरपंचों को पद से हटाया गया है। जो भी व्यक्ति पैसे देकर वसूली कर रहे थे उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जिले में इस प्रकार का यदि कोई मामला सामने आया तो सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि सरकारी पद और पैसे के दुरुपयोग के इस मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत गिरवी रखने के मामले ने महिला सशक्तिकरण की भी धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। किस तरह आदिवासी महिला सरपंचों के पदों पर दबंग रसूखदार अपना आधिपत्य जमाए हुए हैं।

रिपोर्ट- रितेश सिंह राजपूत, गुना

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