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अनोखी बारात का VIDEO वायरल, संविधान रचयिता भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के साथ बग्गी में बैठकर शादी हॉल में पहुंची दुल्हन

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Nov 25, 2025 11:13 am IST,  Updated : Nov 25, 2025 11:15 am IST

मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित नौगांव में एक अनोखी बारात चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां एक दुल्हन बग्गी से अपनी शादी में पहुंची और इस दौरान उसके साथ संविधान रचयिता भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भी थी। इसके वीडियो वायरल हो रहे हैं।

अनोखी बारात चर्चा में - India TV Hindi
अनोखी बारात चर्चा में Image Source : REPORTER INPUT

छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक अनोखी बारात का वीडियो वायरल हो रहा है। इस बारात में दुल्हन बग्गी में बैठी हुई है और उसके साथ संविधान रचयिता भीमराव अंबेडकर की तस्वीर है। दुल्हन इस फोटो के साथ ही शादी हॉल में पहुंची और फिर उसकी शादी हुई। ये शादी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

क्या है पूरा मामला?

मामला छतरपुर के नौगांव का है। शादियों का सीजन चल रहा है, ऐसे में आमतौर पर लड़की वाले बारात का स्वागत करते हैं और दूल्हा बारात लेकर बग्गी पर बैठकर ढोल नगाड़ों के साथ बारात लेकर जाता है। बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में इसके विपरीत हुआ। यहां दुल्हन संविधान के रचयिता बाबा भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के साथ खुद की शादी में बारात लेकर शादी हाल पहुंची और फिर उसके बाद उसकी शादी हुई। इस विवाह समारोह के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

भीमराव अंबेडकर कौन थे?

भीमराव अंबेडकर को बाबासाहेब भी कहा जाता है। वह भारत के महान समाज सुधारक, कानूनी जानकार, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता थे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था। 

उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर् और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की थी, जो उस जमाने में एक दलित परिवार के लड़के के लिए एक बहुत बड़ी बात थी।

वह संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष थे। हिंदू धर्म में व्याप्त जातिवाद से तंग आकर 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। उन्हें मरणोपरांत 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

बाबासाहब अंबेडकर ने दलितों के हक की लड़ाई लड़ी और उन्हें समाज में सम्मान दिलाने के लिए आजीवन प्रयासरत रहे। उन्होंने सदियों से दबाए गए करोड़ों लोगों को आत्मसम्मान, अधिकार और इंसानियत की पहचान दी। वे सिर्फ दलितों के नहीं, पूरे भारत के लिए सुधार कार्यक्रम चलाते रहे। (इनपुट: प्रेम गुप्ता)

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