महाराष्ट्र के बुलढाणा से शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड ने किसानों की आत्महत्या को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान आत्महत्या करता है, तो उसके अंतिम संस्कार में भी किसी को नहीं जाना चाहिए। जब जानवर उनके शरीर को खायेंगे तब एहसास होगा और आत्महत्या नहीं करेंगे। गायकवाड ने तर्क दिया कि ऐसा होने पर लोगों को अपनी जान देने के फैसले के परिणामों का एहसास होगा। उनके इस बयान को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है।
'आत्महत्या करने वाले किसान अपने पत्नी-बच्चों को छोड़ जाते हैं बेसहारा'
संजय गायकवाड ने कहा कि किसानों को आत्महत्या करने के बजाय अपनी समस्याएं सरकार, स्थानीय विधायक और सांसद के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी किसान को कोई परेशानी है, तो उसे सरकार को चिट्ठी लिखनी चाहिए और जनप्रतिनिधियों को अपनी समस्याओं के बारे में बताना चाहिए। उनके मुताबिक, सभी मिलकर किसानों की मदद करने का प्रयास कर सकते हैं।
विधायक ने कहा कि आत्महत्या करने वाले किसान अपने पीछे पत्नी और बच्चों को बेसहारा छोड़ जाते हैं। इससे उनके परिवार को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने किसानों से ऐसा कदम उठाने से पहले अपने परिवार और बच्चों के भविष्य के बारे में सोचने की अपील की।
'जब जानवर शरीर को खाएंगे, तब एहसास होगा'
अपने बयान में गायकवाड ने कहा कि अगर किसान आत्महत्या करते हैं, तो उनके अंतिम संस्कार में भी किसी को शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि जब जानवर उनके शरीर को खाएंगे, तब उन्हें इसके परिणामों का एहसास होगा और वे आत्महत्या नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान आत्महत्या के बाद अपने बच्चों और पत्नी को मुश्किलों में छोड़ जाते हैं, इसलिए उन्हें ऐसा कदम उठाने से पहले अपने परिवार के बारे में सोचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसान आत्महत्या करके अपने बच्चों को एक तरह से सजा देते हैं। किसान अपनी पत्नी के साथ सात फेरे लेकर सात जन्मों का वादा करता है, लेकिन बीच में आत्महत्या कर जीवन समाप्त कर लेता है।
प्रकाश आंबेडकर के बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में टिप्पणी
बता दें कि संजय गायकवाड ने यह बयान वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर की किसानों को लेकर की गई कथित टिप्पणी के संदर्भ में दिया। मीडिया प्रतिनिधि ने उनसे प्रकाश आंबेडकर के उस बयान के बारे में सवाल किया था, जिसमें कथित तौर पर किसानों को 'नालायक' कहा गया था। इसी सवाल का जवाब देते हुए गायकवाड ने किसानों की आत्महत्या का मुद्दा उठाया और कहा कि किसानों को अपनी समस्याएं जनप्रतिनिधियों के सामने रखनी चाहिए।
किसानों की आत्महत्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विधायक के इस बयान ने बहस को जन्म दिया है। जहां उन्होंने किसानों से आत्महत्या नहीं करने और अपने परिवार के बारे में सोचने की अपील की, वहीं अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने और शव को जानवरों द्वारा खाए जाने संबंधी उनकी टिप्पणी चर्चा का केंद्र बन गई है।
28 साल के युवा किसान ने किया सुसाइड
वहीं, आपको बता दें कि 2 दिन पहले ही महाराष्ट्र के लातूर से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर सामने आई थी, जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान की आंखें नम हो जाएं। मराठवाड़ा के सूखे और खेती के भीषण संकट के बीच, कर्ज के भारी बोझ तले दबे एक 28 वर्षीय युवा किसान ने मौत को गले लगा लिया था।
(रिपोर्ट- गणेश सोलंकी)
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