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महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए 15 अगस्त तक मराठी सीखना जरूरी, RTO ने शुरू की जांच, डाटा कलेक्ट किया जा रहा

 Reported By: Saket Rai, Edited By: Subhash Kumar
 Published : May 25, 2026 02:09 pm IST,  Updated : May 25, 2026 02:21 pm IST

महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखना अनिवार्य कर दिया है। ड्राइवर्स के लिए 15 अगस्त तक मराठी सीखना जरूरी है। अब ठाणे में RTO ने चालकों की जांच भी शुरू कर दी है और डाटा कलेक्ट किया जा रहा है।

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महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखना अनिवार्य। Image Source : REPORTER

महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए उन्हें 15 अगस्त तक की मोहलत दी गई है। इस बीच अब महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के आदेश पर ठाणे RTO ने ऑटो रिक्शा चालकों की जांच शुरु कर दी है। RTO द्वारा इस अभियान के तहत मराठी ना बोल पाने वाले चालकों का डाटा कलेक्ट किया जा रहा है। 15 अगस्त के बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी।

मराठी नहीं सीखी तो कार्रवाई भी होगी

राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखना अनिवार्य कर दिया है। 15 अगस्त तक परिवहन विभाग ने राज्य के ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए छूट दी है। आज सुबह से ही ठाणे परिवहन विभाग ने ठाणे में मराठी नहीं जानने वाले ऑटो रिक्शा चालकों की जांच शुरू कर दी है। जिन्हें भाषा का ज्ञान नहीं है उनका डाटा कलेक्ट किया जा रहा है और निर्धारित समय के बाद अगर तब तक भाषा नहीं सीखी तो कार्रवाई भी होगी।

बीजेपी-शिवसेना कर रहे चालकों की मदद

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य किया है जिसके बाद से राज्य में राजनीति तेज हो गई है। सरकार के इस फैसले के बाद काफी विरोध भी देखने को मिला था। बीते कुछ समय से बीजेपी और शिवसेना की तरफ से रिक्शा चालकों के लिए मराठी की पाठशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। चालकों को महाराष्ट्र शासन द्वारा प्रकाशित दो पेज की मराठी बोलचाल पुस्तिका भी बांटी। गई है। 

मुंबई और महाराष्ट्र में मराठी भाषा का मुद्दा हमेशा राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। ऐसे में बीजेपी और शिवसेना उत्तर भारतीय वोट बैंक को साधने के लिए मराठी पाठशालाओं का आयोजन कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) इस पूरे अभियान का श्रेय अपने दबाव की राजनीति को दे रही हैं। बहरहाल मराठी भाषा के इस मुद्दे ने एक बार फिर से महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा दिया है।

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