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BMC में PR एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर क्यों छिड़ा विवाद? 25 लाख रुपये का है मामला

 Reported By: Sachin Chaudhary Written By: Subhash Kumar
 Published : Aug 19, 2026 09:03 pm IST,  Updated : Aug 19, 2026 09:04 pm IST

बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC में PR एजेंसी के लिए 25 लाख रुपये के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर विवाद छिड़ गया है। विपक्षी दलों ने इस मामले में मुंबईकरों के टैक्स के पैसे की बर्बादी के आरोप लगाए हैं।

bmc controversy over PR agency contract- India TV Hindi
BMC में PR एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट पर विवाद। Image Source : BMC

मुंबई की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC में मेयर ऋतु तावड़े को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मामला महानगरपालिका के जनसंपर्क यानी PR से जुड़े करीब 25 लाख रुपये के कॉन्ट्रैक्ट का है। दरअसल, BMC अपने कामकाज और योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए निजी जनसंपर्क एजेंसियों की सेवाएं लेती है। लंबे समय से ‘रन टाइम सॉल्यूशन’ नाम की कंपनी BMC के लिए यह काम कर रही है। कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट को अगस्त 2026 से जुलाई 2027 तक आगे बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है।

मेयर ने आरोपों को नकारा

आरोप है कि कंपनी की ओर से BMC में जमा किए गए पत्र में मेयर ऋतु तावड़े की मंजूरी का जिक्र किया गया था। इसके बाद मेयर ने ही इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने न तो ऐसा कोई पत्र दिया है और न ही इस कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी है। उनका आरोप है कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है।

मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि इस पूरे मामले में राजनीति की जा रही है। उन्होंने संबंधित विभाग को वह पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिसमें उनके नाम और मंजूरी का उल्लेख किया गया है। मेयर का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव BMC कमिश्नर के हस्ताक्षर से आया है, तो इसमें उनका नाम क्यों जोड़ा गया? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ‘रन टाइम सॉल्यूशन’ को ही यह काम क्यों दिया जा रहा है और इस काम को दो-तीन लोगों के माध्यम से क्यों नहीं कराया जा सकता।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

वहीं, कांग्रेस नेता अमीन पटेल ने इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी और BMC प्रशासन पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि मुंबईकरों के टैक्स के पैसे का इस्तेमाल जमीनी काम के बजाय PR और पब्लिसिटी पर किया जा रहा है। अमीन पटेल का कहना है कि BMC को मुंबईकरों के पैसे का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए और महानगरपालिका के कामकाज के प्रचार के नाम पर फिजूलखर्ची नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, BMC का MyBMC पोर्टल है, जहां महानगरपालिका के विभिन्न विभागों के कामकाज की जानकारी साझा की जाती है। मेयर और BMC कमिश्नर के दौरे और अन्य गतिविधियों की वीडियो शूटिंग कर उन्हें सोशल मीडिया और पोर्टल के जरिए लोगों तक पहुंचाने का काम भी इसी जनसंपर्क व्यवस्था के तहत किया जाता है। बता दें कि इससे पहले BMC के पार्षदों और प्रमुख कमेटियों के नेताओं को टैबलेट देने के प्रस्ताव पर भी विवाद हुआ था।

मेयर ने पूछा- मेरे नाम का इस्तेमाल क्यों?

मेयर ऋतु तावड़े का कहना है कि उनके मेयर बनने से पहले से ही यह एजेंसी BMC के लिए काम कर रही है। लेकिन इस बार कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने के प्रस्ताव में उनके नाम और मंजूरी का उल्लेख किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया है। मेयर ने साफ कहा कि अगर किसी प्रस्ताव पर कमिश्नर के हस्ताक्षर हैं, तो फिर उसमें मेयर की मंजूरी का जिक्र क्यों किया गया? उन्होंने संबंधित पत्र की जांच कराने की बात कही है।

 BMC की राजनीति गरमाई

बहरहाल, BMC में बीजेपी की सत्ता आने के बाद मेयर को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। पहले BMC बंगले के रिनोवेशन, फिर इनोवा कारों की खरीद और अब PR एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट का मुद्दा सामने आया है। अब सवाल यह है कि क्या यह महज BMC के जनसंपर्क विभाग से जुड़ा सामान्य कॉन्ट्रैक्ट है या फिर मेयर के नाम और मंजूरी के कथित गलत इस्तेमाल के पीछे कोई और वजह है? फिलहाल इस मामले को लेकर BMC की राजनीति गरमा गई है।

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