महाराष्ट्र सरकार ने ग्रेटर मुंबई पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र के ऑर्केस्ट्रा बार मालिकों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। सरकार के नए निर्देश के मुताबिक, परिसर लाइसेंस की बढ़ी हुई 2 लाख रुपये की फीस अब 1 जनवरी 2018 के बजाय 1 जनवरी 2020 से लागू होगी। इसके अलावा, लाइसेंस के सालाना नवीनीकरण शुल्क में होने वाली बढ़ोतरी को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत प्रति वर्ष कर दिया गया है। साथ ही, कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान 2020 और 2021 में जिन अवधियों में प्रतिष्ठान बंद रहे, उन अवधियों के लिए परिसर और प्रदर्शन लाइसेंस की फीस में आनुपातिक छूट दी जाएगी।
मालिकों को काफी आर्थिक राहत
पहले की व्यवस्था की तुलना में सरकार की ओर से किए गए इस फैसले से ऑर्केस्ट्रा बार मालिकों को काफी आर्थिक राहत मिलेगी। उन्हें 2018 से पिछली तारीखों के आधार पर बढ़ी हुई फीस और सालाना चक्रवृद्धि बढ़ोतरी का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। फीस में बढ़ोतरी दो साल आगे खिसका दी गई है, सालाना नवीनीकरण शुल्क में होने वाली बढ़ोतरी आधी कर दी गई है और कोरोना लॉकडाउन के दौरान कारोबार बंद रहने की अवधि के लिए लाइसेंस फीस में छूट दी जाएगी।
क्यों लिया गया फैसला?
बॉम्बे हाई कोर्ट में इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन की ओर से दायर रिट याचिका के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। याचिका में बताया गया था कि भारी आर्थिक बोझ के कारण बार मालिक लाइसेंस फीस का भुगतान नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद इस मामले पर चर्चा हुई और सरकार ने वर्ष 2019 की मूल अधिसूचना की समीक्षा की।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
सरकार के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विपक्ष सरकार पर हमला बोलते हुए कह रहा है कि एक तरफ राज्य में सूखे की स्थिति है और किसान तत्काल राहत की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं सरकार किसानों को राहत देने के बजाय डांस बार मालिकों को राहत दे रही है। विपक्ष ने सरकार पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाया है। वहीं, सरकार का कहना है कि बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका और अदालत की प्रक्रिया के बाद यह फैसला लिया।
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