महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले सियासी समीकरण बदल रहे हैं। शरद पवार ने मुंबई में पत्रकारों से कहा है कि वह बीजेपी छोड़ किसी भी दल के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर वह अजित पवार या एकनाथ शिंदे की पार्टी के साथ गठबंधन करते हैं को महाविकास अघाड़ी और महायुति गठबंधन का क्या होगा और दोनों गठबंधन में शामिल दल क्या फैसला करेंगे। महाराष्ट्र में महानगर पालिका, जिला परिषद, पंचायत समिति और नगरपालिका चुनाव जल्द ही होने वाले हैं।
मुंबई में आमतौर पर शिवसेना और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता था। इस बार शिवसेना दो हिस्सों में बंटी हुई है। ऐसे में उद्धव ठाकरे मनसे के साथ मिलकर स्थानीय चुनाव लड़ सकते हैं। ठाकरे परवार के एक होने की खबरें लंबे समय से चल रही हैं। चुनाव से पहले अगर उद्धव और राज ठाकरे साथ आते हैं तो उद्धव गुट को मजबूती मिलेगी। हालांकि, महाविकास अघाड़ी में इससे दरार पड़ सकती है।
शरद पवार ने कहा है कि वह बीजेपी के अलावा किसी भी दल के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं। ऐसे में वह एनसीपी अजीत गुट के साथ भी गठबंधन कर सकते हैं। ऐसा होने पर महायुति में भी दरार पड़ सकती है। हालांकि, इसकी संभवानाएं कम ही नजर आती हैं। शरद पवार के पास दूसरा विकल्प अन्य छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करने का है। मुंबई में एनसीपी की पकड़ ज्यादा मजबूत नहीं है। ऐसे में वह अकेले चुनाव नहीं लड़ना चाहेंगे।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान विपक्षी दलों ने इंडिया गठबंधन बनाया था। महाराष्ट्र में इस गठबंधन का प्रदर्शन भी शानदार था। इसके बाद विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी को करारी हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा चुनाव के बाद इंडिया गठबंधन भी बिखर रहा है। आम आदमी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस और टीएमसी की राहें भी अलग हो चुकी हैं। ऐसे में महाविकास अघाड़ी भी टूट सकती है। इस स्थिति में शरद पवार और उद्धव ठाकरे स्थानीय दलों के साथ गठबंधन कर अपनी जमीन बचा सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस को अपना खोया हुआ जनसमर्थन हासिल करना होगा।
विधानसभा चुनाव में महायुति ने शानदार प्रदर्शन किया था और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। ऐसे में बीजेपी का ही मुख्यमंत्री भी राज्य में है। इस गठबंधन में सब ठीक नजर आ रहा है। अब तक किसी ने भी गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ने की बात नहीं कही है। गठबंधन से अलग होने पर एकनाथ शिंदे और अजित पवार को ही ज्यादा नुकसान होगा। इसी वजह से पूरी संभावना नजर आ रही है कि महायुति के दल साथ निकाय चुनाव लड़ेंगे। वहीं, महाविकास अघाड़ी के दल अलग-अलग चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
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