मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से दल-बदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। दरअसल, भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन के एक बयान ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना में खलबली बचा दी है। गिरीश महाजन ने एक बयान में दावा कि शिवसेना (UBT) के कई सांसद और विधायक उनके संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर भरोसा नहीं है। इसके अलावा गिरीश महाजन ने यह भी आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ‘‘पलटी बहादुर’’ हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में त्रिभाषा नीति के कार्यान्वयन पर विवाद के बीच उनका आचरण अपरिपक्व है।
'पिता की विचारधारा से भटके ठाकरे'
भाजपा नेता गिरीश महाजन ने दावा कि उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री (2019 में) बनने की चाह में अपने पिता बाल ठाकरे की विचारधारा से भटककर अपना राजनीतिक भविष्य बर्बाद कर लिया। बता दें कि हाल ही में उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ने लगभग दो दशक बाद पहली बार मुंबई में एक रैली में मंच साझा किया। इस घटना के बाद भाजपा नेता गिरीश महाजन का यह बयान आया है, जिसने राजनीति में खलबली मचा दी है। बता दें कि राज ठाकरे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख हैं।
'कई सांसद और विधायक संपर्क में हैं'
भाजपा नेता गिरीश महाजन ने सोलापुर में कहा, “आज भी उद्धव ठाकरे गुट के कई विधायक और सांसद मेरे संपर्क में हैं।” उन्होंने कहा, “अगर आपको मेरी बात पर यकीन नहीं है, तो आप जल्द ही खुद ही यह देख लेंगे।” गिरीश महाजन ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में लोगों को बिलकुल भी भरोसा नहीं है। उन्होंने उद्धव ठाकरे को ‘‘पलटी बहादुर’’ बताते हुए दावा किया कि उनका आचरण अपरिपक्व है। गिरीश महाजन ने कहा, “उद्धव ठाकरे ने मौजूदा सरकार का विरोध करने के लिए ही अपना रुख बदला है। आगामी जिला परिषद, पंचायत समिति और नगर निगम चुनावों के नतीजे बताएंगे कि प्रत्येक नेता पर जनता का कितना भरोसा है।”
'अपना भविष्य बर्बाद कर लिया'
वहीं मंत्री गिरीश महाजन ने उद्धव ठाकरे पर अपने पिता बाल ठाकरे की विचारधारा को त्यागने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया, “उन्होंने (2019 के राज्य विधानसभा चुनावों के बाद) शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस से हाथ मिलाने के लिए बालासाहेब के हिंदुत्व को दरकिनार कर दिया। मुख्यमंत्री बनने की चाहत में उन्होंने अपना राजनीतिक भविष्य बर्बाद कर लिया है।” (इनपुट- पीटीआई)