मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेद्र फडणवीस और शिवेसेना सांसद संजय राउत के बीच शनिवार को एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। दोनों ही नेताओं के बीच मुंबई के ग्रैंड हयात होटल में करीब 2 घंटे तक यह बैठक चली थी। बैठक में क्या बात हुई यह तो पता नहीं चल पाया, लेकिन अफवाहों का बाजार जरूर गर्म हो गया है। वहीं, बीजेपी ने यह कहकर अफवाहों को और बल दिया है कि आने वाले दिनों में ऐसी और भी बैठकें होंगी, हालांकि उसने यह भी कहा कि उसका सरकार गिराने का इरादा नहीं है।
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महाराष्ट्र में चल रही बिहार पैटर्न दोहराने की तैयारी?
देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत की मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में यह सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि कहीं महाराष्ट्र में भी तो बिहार पैटर्न दोहराने की तैयारी नहीं हो रही है। बता दें कि बिहार में 2015 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद जेडीयू और आरजेडी ने मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन कुछ ही महीने बाद दोनों में मतभेद सामने आए और नीतीश की पार्टी भगवा दल के साथ आ गई और आरजेडी सत्ता से बाहर हो गई। महाराष्ट्र की कहानी हालांकि उससे थोड़ी-सी अलग है। यहां बीजेपी-शिवसेना साथ मिलकर चुनाव लड़े थे, लेकिन बाद में उद्धव की पार्टी ने कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन कर सरकार बना ली थी।
'सामना' के लिए फडणवीस का इंटरव्यू करना चाहते थे राउत
दोनों नेताओं के बीच मुंबई के ग्रैंड हयात होटल में करीब 2 घंटे तक चली बैठक के बाद कयास के बादल उठने शुरू हुए हैं। हालांकि इस मुलाकात पर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कहा गया कि संजय राउत 'सामना' अखबार के लिए देवेंद्र फडणवीस का इंटरव्यू करना चाहते थे, और इसी सिलसिले में वह उनसे मिले हैं। हालांकि राजनीतिक हलको में इस बात की चर्चा तेज है कि महाविकास अघाड़ी सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और खतरे की घंटी बज चुकी है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में यह मुलाकात क्या रंग लाती है।
फडणवीस से पहले दानवे से मिले थे राउत
बता दें कि इससे पहले 18 सितंबर को केंद्रीय राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे और संजय राउत के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के एक हफ्ते बाद संजय राउत आज देवेंद्र फडणवीस से मिले हैं। उस मुलाकात के बाद रावसाहेब दानवे ने कहा था कि हम दोनों के घर आसपास है और मैं उनके घर मॉर्निंग वॉक करते हुए चाय पीने गया था। गौरतलब है कि इसी मुलाकात के बाद शिवसेना के सांसद राज्यसभा में कृषि बिल पर मतदान से पहले बाहर चले गए थे।