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भारत में सस्ती होंगी ब्रिटेन की कारें! 15 जुलाई से लागू होगा नया नियम, 3.78 लाख गाड़ियों को मिलेगी कम ड्यूटी का फायदा

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jun 18, 2026 04:38 pm IST,  Updated : Jun 18, 2026 04:38 pm IST

भारत में कार खरीदने वालों के लिए 15 जुलाई से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के लागू होने के बाद ब्रिटेन से आने वाली कई कारों पर आयात शुल्क में भारी कटौती होगी।

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भारत ने ब्रिटेन की 3.78 लाख कारों को दी रियायती एंट्री Image Source : CANVA

भारतीय कार बाजार में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहे भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) के तहत ब्रिटेन से आने वाली कई कारों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती की जाएगी। इससे आने वाले वर्षों में भारतीय ग्राहकों को कई विदेशी कारें पहले की तुलना में कम कीमत पर मिल सकती हैं। सरकार ने अगले 15 वर्षों में 3.78 लाख कारों के आयात की अनुमति देने का फैसला किया है।

110% से घटकर 10% तक पहुंचेगी ड्यूटी

इस समझौते के तहत कुछ कैटेगरी की कारों पर लगने वाली आयात ड्यूटी धीरे-धीरे घटाई जाएगी। अभी कई विदेशी कारों पर करीब 110 फीसदी तक शुल्क लगता है, लेकिन भविष्य में यह घटकर 10 फीसदी तक पहुंच जाएगा। हालांकि यह राहत तय कोटा के भीतर आने वाली गाड़ियों पर ही लागू होगी। पहले वर्ष में करीब 20,000 कारों के आयात की अनुमति मिलेगी। बाद के वर्षों में यह संख्या बढ़ती जाएगी और पांचवें वर्ष तक वार्षिक कोटा 37,000 कारों तक पहुंच सकता है।

भारतीय ग्राहकों को क्या होगा फायदा?

कम आयात शुल्क का सीधा असर कारों की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे ब्रिटेन की कई प्रीमियम और लग्जरी कारें भारत में पहले की तुलना में सस्ती हो सकती हैं। खासकर उच्च क्षमता वाले पेट्रोल और डीजल इंजन वाली कारों के खरीदारों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे।

भारतीय कंपनियों के लिए भी खुलेंगे नए अवसर

यह समझौता केवल ब्रिटिश कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए भी बड़ा मौका लेकर आया है। छठे वर्ष से भारत को ब्रिटेन में इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों के निर्यात पर ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी। इसका फायदा टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों को मिल सकता है। 15वें वर्ष तक भारतीय कंपनियां ब्रिटेन में सालाना 88,000 तक इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों का निर्यात कर सकेंगी।

इलेक्ट्रिक कारों पर अभी रहेगी सुरक्षा

सरकार ने घरेलू ईवी उद्योग को ध्यान में रखते हुए ब्रिटेन की सस्ती इलेक्ट्रिक कारों के लिए बाजार पूरी तरह नहीं खोला है। 40,000 यूरो (करीब 45 लाख रुपये) से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को इस समझौते में कोई विशेष रियायत नहीं दी गई है। इससे भारत की घरेलू ईवी कंपनियों को सुरक्षा मिलेगी और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलता रहेगा।

15 जुलाई से शुरू होगा नया दौर

भारत और ब्रिटेन के बीच यह व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू होगा। माना जा रहा है कि इससे ऑटो सेक्टर में नई प्रतिस्पर्धा शुरू होगी, विदेशी कारें अपेक्षाकृत सस्ती होंगी और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में विस्तार का बड़ा मौका मिलेगा। आने वाले वर्षों में इसका असर भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार की तस्वीर बदल सकता है।

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