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विलय से 10 सरकारी बैंकों की 2,118 शाखाएं खत्म, आरबीआई ने RTI के तहत दी जानकारी

सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर इन्हें चार बड़े बैंकों में तब्दील कर दिया था। इसके बाद अब सरकारी बैंकों की तादाद घटकर 12 रह गई है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: May 09, 2021 15:29 IST
विलय के बाद 2118 बैंक...- India TV Paisa
Photo:PTI

विलय के बाद 2118 बैंक ब्रांच हुई खत्म

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने सूचना के अधिकार के तहत बताया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 10 सरकारी बैंकों की कुल 2,118 बैंकिंग शाखाएं या तो हमेशा के लिए बंद कर दी गयीं या इन्हें दूसरी बैंक शाखाओं में मिला दिया गया है। आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने रविवार को "पीटीआई-भाषा" को बताया कि रिजर्व बैंक ने उन्हें सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी दी है। इस जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में शाखा बंदी या विलय की प्रक्रिया से बैंक ऑफ बड़ौदा की सर्वाधिक 1,283 शाखाओं का वजूद खत्म हो गया। इस प्रक्रिया से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 332, पंजाब नेशनल बैंक की 169, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की 124, केनरा बैंक की 107, इंडियन ओवरसीज बैंक की 53, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की 43, इंडियन बैंक की पांच और बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं पंजाब एंड सिंध बैंक की एक-एक शाखा बंद हुई। इस ब्योरे में स्पष्ट नहीं किया गया है कि दी गयी अवधि के दौरान इन बैंकों की कितनी शाखाएं हमेशा के लिए बंद कर दी गईं और कितनी शाखाओं को दूसरी शाखाओं में मिला दिया गया।

रिजर्व बैंक ने आरटीआई के तहत बताया कि 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष 2020-21 में बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक की कोई भी शाखा बंद नहीं हुई। आरटीआई के तहत दिए जवाब में संबंधित 10 सरकारी बैंकों की शाखाओं के बंद होने या इन्हें अन्य शाखाओं में मिलाए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया है। लेकिन सरकारी बैंकों के महाविलय की योजना के एक अप्रैल 2020 से लागू होने के बाद शाखाओं की संख्या को युक्तिसंगत बनाना इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर इन्हें चार बड़े बैंकों में तब्दील कर दिया था। इसके बाद अब सरकारी बैंकों की तादाद घटकर 12 रह गई है। महाविलय के तहत एक अप्रैल 2020 से ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को पंजाब नेशनल बैंक में, सिंडिकेट बैंक को केनरा बैंक में, आंध्रा बैंक व कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में और इलाहाबाद बैंक को इंडियन बैंक में मिला दिया गया था। 

इस बीच, अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने "पीटीआई-भाषा" से कहा कि सरकारी बैंकों की शाखाएं घटना भारत के बैंकिग उद्योग के साथ ही घरेलू अर्थव्यवस्था के हित में भी नहीं है तथा बड़ी आबादी के मद्देनजर देश को बैंक शाखाओं के विस्तार की जरूरत है। वेंकटचलम ने कहा, "सरकारी बैंकों की शाखाएं घटने से बैंकिंग उद्योग में नये रोजगारों में भी लगातार कटौती हो रही है जिससे कई युवा मायूस हैं। पिछले तीन साल में सरकारी बैंकों में नयी भर्तियों में भारी कमी आई है।" दूसरी तरफ, अर्थशास्त्री जयंतीलाल भंडारी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के सरकारी कदम को सही ठहराते हैं। उन्होंने कहा, "देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए हमें छोटे आकार के कमजोर सरकारी बैंकों के बजाय बड़े आकार के मजबूत सरकारी बैंकों की जरूरत है।" 

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