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GST व्यवस्था में राज्‍यों को राजस्व नुकसान की हर तिमाही होगी भरपाई

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Nov 26, 2016 06:04 pm IST,  Updated : Nov 26, 2016 06:04 pm IST

देश में वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों को केंद्र से हर तिमाही राजस्व नुकसान की फौरी तौर पर भरपाई की जाएगी।

GST व्यवस्था में राज्‍यों को राजस्व नुकसान की हर तिमाही होगी भरपाई, सरकार ने जारी किया संशोधित विधेयक मसौदा- India TV Hindi
GST व्यवस्था में राज्‍यों को राजस्व नुकसान की हर तिमाही होगी भरपाई, सरकार ने जारी किया संशोधित विधेयक मसौदा

नई दिल्ली। देश में वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों को केंद्र से हर तिमाही राजस्व नुकसान की फौरी तौर पर भरपाई की जाएगी। इस संबंध अंतिम आंकड़े खातों की लेखापरीक्षा के बाद ही तय किए जाएंगे। जीएसटी व्यवस्था में राज्यों को उनके राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए उपकर लगाया जाएगा। इस उपकर को जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर नाम दिया गया है, जिसे भोग विलासिता और तंबाकू जैसे उत्पादों पर लगाया जाएगा। यह उपकर जीएसटी लागू होने के पहले पांच साल तक जारी रहेगा।

उपकर से मिलने वाली राशि जीएसटी क्षतिपूर्ति कोष में रखी जाएगी और पांच साल की समाप्ति पर इस कोष में यदि कुछ राशि बचती है तो उसे केन्द्र और राज्यों के बीच विभाजित कर दिया जाएगा। जीएसटी मुआवजा विधेयक के मसौदे में इसका प्रावधान किया गया है। केंद्र ने इस मसौदे को आज सार्वजनिक कर दिया।

इसमें कहा गया है कि पांच साल के बाद कोष में शेष राशि के 50 प्रतिशत को भारत की संचित निधि में डाल दिया जाएगा और यह समेकित कोष का हिस्सा होगी।

  • कानून के तहत इस राशि को निर्धारित अनुपात में केन्द्र और राज्यों में विभाजित कर दिया जाएगा।
  • शेष 50 प्रतिशत राशि को राज्यों के बीच उनके कुल राजस्व के अनुपात में बांटा जाएगा।
  • राज्यों के राजस्व अनुपात का निर्धारण जीएसटी व्यवस्था के तहत आखिरी वर्ष में उन्हें प्राप्त राजस्व के आधार पर तय किया जाएगा।
  • राज्यों के किसी एक वर्ष में की गई क्षतिपूर्ति यदि लेखापरीक्षा के बाद सामने आए आंकड़ों की तुलना में अधिक निकलती है तो ऐसी अतिरिक्त राशि को अगले वित्त वर्ष की क्षतिपूर्ति में समायोजित कर दिया जाएगा।
  • किसी राज्य के राजस्व नुकसान का आकलन उस राज्य को वर्ष 2015-16 के दौरान पुरानी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के तहत प्राप्त राजस्व आय के आधार पर किया जाएगा।
  • इसमें 14 प्रतिशत राजस्व वृद्धि जोड़कर जीएसटी व्यवस्था के तहत प्राप्त राजस्व आय से तुलना करने पर यदि कमी रहती है तो उसके अंतर को ही राज्य का राजस्व नुकसान माना जाएगा।
  • केंद्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी विधेयकों के मसौदे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद में विचार किया जाएगा। परिषद की बैठक 2-3 दिसंबर को होनी है।
  • जीएसटी परिषद इससे पहले हुई बैठक में नई व्यवस्था के तहत 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार स्तरीय कर ढांचे का फैसला कर चुकी है।
  • इसमें अनाज और खाद्यान्न को शून्य कर वर्ग में रखा गया है,जबकि विलासित और तंबाकू जैसे उत्पादों को सबसे ऊंचे कर वर्ग में रखा गया है जिसपर उपकर भी लगेगा।
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