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GST में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में सरकार, तीन स्तरीय शुल्‍क ढांचे पर चल रहा है विचार

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Aug 05, 2021 11:51 am IST,  Updated : Aug 05, 2021 11:51 am IST

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही सरकार ने 7,421 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया है, जिसमें से केवल 1,920 करोड़ रुपये की वसूली ही की जा सकी है।

GST systematically flawed there is lot of tax leakage, soon 3tier GST with highest slab at 18percent- India TV Hindi
GST systematically flawed there is lot of tax leakage, soon 3tier GST with highest slab at 18percent Image Source : PHOTOPEA

नई दिल्‍ली। वन नेशन- वन टैक्‍स की अवधारणा वाले माल एवं सेवा कर (GST) ढांचे में कुछ व्‍यवस्‍थागत खामियां हैं, जिसकी वजह से धड़ल्‍ले से टैक्‍स चोरी हो रही है। जीएसटी को लागू करते वक्‍त केंद्र सरकार ने दावा किया था कि इससे माल यातायात निर्बाध और तेज होगा एवं उपभोक्‍ताओं को फायदा होगा क्‍योंकि कम करों की वजह से कीमतें घटेंगी। लेकिन इन दोनों ही मोर्चों पर कोई उल्‍लेखनीय उप‍लब्धि हासिल अभी तक नहीं हुई है। चालू वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही में ही सरकार ने 7,421 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया है, जिसमें से केवल 1,920 करोड़ रुपये की वसूली ही की जा सकी है। जीएसटी व्‍यवस्‍था में खामियों को लेकर कई राज्‍यों के वित्‍तमंत्री और उद्योग संगठन पहले भी आवाज उठाते रहे हैं। इन सबके चलते केंद्र सरकार अब जीएसटी कर ढांचे को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रही है।

हाल ही में केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने जीएसटी ढांचे में व्यवस्थागत बदलाव की मांग करते हुए कहा कि हर राज्य और उपभोक्ता को इसकी मूल रूप से त्रुटिपूर्ण संरचना के कारण नुकसान हुआ है। साथ ही इसकी वजह से राज्यों के लिए राजस्व के मोर्चे पर घाटा हुआ है। माल और सेवा कर (GST) व्यवस्था जुलाई 2017 में लागू हुई थी। हालांकि यह संरचना एक राष्ट्र-एक कर मॉडल पर केंद्रित है, लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों और शराब सहित कुछ चीजें अब भी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।

बालगोपाल ने कहा कि माल एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था के चार वर्षों में हमारे अपने कर राजस्व में 61 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई है, क्योंकि संरचना और जीएसटी का डिजाइन दोनों ही व्यवस्थित रूप से त्रुटिपूर्ण हैं। इससे कर चोरी के लिए पर्याप्त जगह बन गई है और जहां तक ​​मैं जानता हूं, यह सिर्फ केरल के लिए नहीं बल्कि सभी राज्यों के लिए है। बालगोपाल ने यह भी कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद केरल के कुल राजस्व में एक तिहाई की गिरावट आई है। उन्होंने चार साल पुरानी इस कर व्यवस्था में कुछ आमूल-चूल परिवर्तन करने का आह्वान किया है। हालांकि उन्होंने जरूरी बदलावों के बारे में विस्तार से नहीं बताया।

तमाम उपायों के बाद भी नहीं रुक रही चोरी

जीएसटी अधिकारियों ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि में 7,421 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा को एक लिखित उत्तर में पिछले तीन वर्षों में जीएसटी में कुल कर चोरी का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में कर चोरी के 10,657 मामलों का पता चला, जिसमें 40,853. 27 करोड़ रुपये शामिल थे। इसमें से वसूली 18,464 करोड़ रुपये की हुई। वर्ष 2020-21 में जीएसटी के 12,596 मामलों में 49,384 करोड़ रुपये की जीएसटी कर चोरी का पता चला जिसमें से वसूली 12,235 करोड़ रुपये की हुई। चालू वित्त वर्ष में जून तक, 7,421. 27 करोड़ रुपये की माल और सेवा कर (जीएसटी) चोरी के 1,580 मामलों का पता चला, और अप्रैल-जून 2021 में 1,920 करोड़ रुपये की वसूली हुई।

तीन स्तरीय जीएसटी ढांचा समय की जरूरत

उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने खपत को बढ़ावा देने और कर चोरी पर लगाम लगाने के लिए बुधवार को 18 प्रतिशत उच्च दर के साथ जीएसटी शुल्क ढांचा तीन स्तरीय करने की मांग की। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत फिलहाल चार दरों वाली संरचना है। इसके तहत आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी से छूट है, जबकि कुछ सामानों पर पांच प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है। वहीं उच्चतम दर 28 प्रतिशत है। कर के अन्य स्लैब 12 और 18 प्रतिशत हैं। इसके अलावा, सोना, चांदी और तराशे गए हीरे पर तीन प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाता है।

पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि एक आदर्श जीएसटी ढांचे में दो से तीन स्लैब होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा सुझाव है कि पांच प्रतिशत की न्यूनतम दर, 12 प्रतिशत की मध्यम दर, 12 और 18 प्रतिशत की श्रेणी को मिलाकर तथा केवल विलासिता और समाज के नजरिये से अहितकर वस्तुओं के लिए उच्चतम दर 18 प्रतिशत जीएसटी होना चाहिए। उद्योग मंडल ने कहा कि दरों को युक्तिसंगत बनाने से खपत और कर राजस्व में वृद्धि होगी, अनुपालन बोझ कम होगा, कर चोरी कम होगी तथा जीएसटी को अच्छा एवं सरल कर बनाने में मदद मिलेगी। कर मामलों से संबंधित मुकदमेबाजी को कम करने के लिए एक सरल कर व्यवस्था समय की जरूरत है।

सरकार कर रही है विचार

मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमणियम ने भी कहा है कि जीएसटी दरों के ढांचे को युक्तिसंगत बनाना सरकार के एजेंडे में है और निश्चित रूप से यह होने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक जीएसटी का सवाल है तीन दरों वाला ढांचा काफी महत्वपूर्ण है और उल्टे शुल्क ढांचे (तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल पर अधिक आयात शुल्क) को भी ठीक करने की जरूरत है। यह पूछे जाने पर कि क्या जीएसटी के तहत दरों की संरचना को युक्तिसंगत करने की जरूरत है, सुब्रमणियत ने कहा कि मुझे लगता है कि यह निश्चित रूप से होने जा रहा है। मूल योजना तीन-दरों वाली संरचना की थी। सीईए ने कहा कि तीन स्तरीय ढांचा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है और उल्टा शुल्क ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जिसे ठीक करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि सरकार की इस पर नजर है और जल्द ही इस संबंध में कुछ देखने को मिल सकता है।

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