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2022 तक पीएम मोदी का सपना होगा पूरा, मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन में खर्च होंगे 10,000 करोड़ रुपए

अंतरिक्ष उत्साहियों के लिए चंद्रमा पर मानव मिशन भेजना हमेशा एक बड़ा सपना रहा है, और इस क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों स्पेस एक्स के सीईओ रलोन मस्क, ब्लू ऑरिजिन के सीईओ जेफ बेजोस और वर्जिन गैलेक्टिस के संस्थापक सर रिचर्ड ब्रानसन के साथ ही नासा का लक्ष्य मनुष्य को गहरे अंतरिक्ष में भेजना है, जिसके लिए चंद्रमा आने वाले सालों में एक पड़ाव का काम करेगा।

IANS IANS
Updated on: August 25, 2019 16:49 IST
human space flight missions- India TV Paisa

human space flight missions

नई दिल्ली। अंतरिक्ष उत्साहियों के लिए चंद्रमा पर मानव मिशन भेजना हमेशा एक बड़ा सपना रहा है, और इस क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों स्पेस एक्स के सीईओ रलोन मस्क, ब्लू ऑरिजिन के सीईओ जेफ बेजोस और वर्जिन गैलेक्टिस के संस्थापक सर रिचर्ड ब्रानसन के साथ ही नासा का लक्ष्य मनुष्य को गहरे अंतरिक्ष में भेजना है, जिसके लिए चंद्रमा आने वाले सालों में एक पड़ाव का काम करेगा। भारत ने पांच साल पहले एक इतिहास रचा था, जब किसी देश ने पहले ही प्रयास में चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने में कामयाबी हासिल की। अब साल 2022 तक चंद्रमा पर एक मानव मिशन भेजने की तैयारी की जा रही है। 

मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन पीएम मोदी की है महात्वाकांक्षी योजना, 10,000 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान

देश के महत्वाकांक्षी 'गगनयान' कार्यक्रम के तहत दो अनमैन्ड और एक मैन्ड (मानवयुक्त) फ्लाइट अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। देश का मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन प्रधानमंत्री की प्रिय परियोजनाओं में से एक है। इसकी लागत करीब 10,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है। भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (इसरो) के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर (एचएसएफसी) का लक्ष्य 2022 तक अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजना है।

इसरो ने गगनयान के लिए रूस की ग्लावकोसमोस से किया समझौता

इसरो ने 'गगनयान' परियोजना में मदद के लिए रूस की लांच सेवा प्रदाता ग्लावकोसमोस से समझौता किया है। ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर में मानव स्पेश मिशन्स के लिए जरूरी प्रौद्योगिकीयों को विकसित किया जा रहा है। इस फैक्लटी के निदेशक एस. उन्नीकृष्णन नायर हैं। वहीं, पोलर सैटेलाइट लांच वेहिकल (पीएसएलवी) के निदेशक आर. हट्टन गगनयान परियोजना की अगुवाई कर रहे हैं। 

भारत के 2022 में अंतरिक्ष में जाने की योजना बनाने के छह दशक पहले ही रूस अपने अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन को अंतरिक्ष भेज चुका है। वे अंतरिक्ष में जाने वाले पहले मानव थे, जो धरती की कक्षा में बाहरी अंतरिक्ष में 1961 में गए थे। अमेरिका, रूस और चीन केवल ये तीन देश ही मानव स्पेस परियोजना चला चुके हैं।

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